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ईरान संकट के बीच ट्रंप की नई अपील: होर्मुज़ जलडमरूमध्य की सुरक्षा के लिए युद्धपोत भेजने को कहा, दुनिया की प्रतिक्रियाएँ अलग-अलग

15 मार्च 2026 |✍🏻 Z S Razzaqi | अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक एवं वरिष्ठ पत्रकार

मध्य-पूर्व में तेज़ी से बिगड़ते हालात और ईरान-अमेरिका-इज़राइल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच वैश्विक कूटनीति एक नए मोड़ पर पहुँच गई है। इसी पृष्ठभूमि में अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने एक महत्वपूर्ण और विवादास्पद अपील की है।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म Truth Social पर शनिवार को एक पोस्ट लिखते हुए दुनिया की प्रमुख शक्तियों—China, France, Japan, South Korea और United Kingdom—से अपील की कि वे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग Strait of Hormuz की सुरक्षा के लिए अपने युद्धपोत तैनात करें।

यह अपील ऐसे समय आई है जब मध्य-पूर्व में युद्ध जैसे हालात बनते जा रहे हैं और दुनिया की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा पर निर्भर है।


क्यों इतना महत्वपूर्ण है होर्मुज़ जलडमरूमध्य?

Strait of Hormuz दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है।

  • यह Persian Gulf को Gulf of Oman और फिर Arabian Sea से जोड़ता है।

  • वैश्विक कच्चे तेल का लगभग 20–30% हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है।

  • Saudi Arabia, UAE, Kuwait, Iraq जैसे तेल उत्पादक देशों की ऊर्जा आपूर्ति इसी मार्ग पर निर्भर है।

अगर इस जलडमरूमध्य में सैन्य टकराव या नाकेबंदी होती है तो दुनिया भर में तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ सकता है।


ट्रंप की रणनीति: बहुपक्षीय सैन्य सुरक्षा

राष्ट्रपति Donald Trump का तर्क है कि इस रणनीतिक समुद्री मार्ग की सुरक्षा केवल अमेरिका की ज़िम्मेदारी नहीं हो सकती।

उनके अनुसार:

  • विश्व अर्थव्यवस्था इस मार्ग पर निर्भर है

  • इसलिए कई देशों को मिलकर इसकी रक्षा करनी चाहिए

  • अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक उपस्थिति ईरान को किसी भी संभावित अवरोध या हमले से रोक सकती है

हालाँकि, ट्रंप की इस अपील को दुनिया भर में तुरंत समर्थन नहीं मिला।


ब्रिटेन की सतर्क प्रतिक्रिया

United Kingdom ने इस प्रस्ताव पर सीधे सहमति नहीं दी, लेकिन संकेत दिया कि वह सहयोगियों के साथ चर्चा कर रहा है।

ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि क्षेत्र में समुद्री व्यापार की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।

विश्लेषकों का मानना है कि ब्रिटेन किसी भी सैन्य कदम से पहले व्यापक अंतरराष्ट्रीय सहमति चाहता है।


चीन का अलग रुख

China ने युद्धपोत भेजने पर स्पष्ट सहमति नहीं दी।

वॉशिंगटन स्थित चीनी दूतावास के प्रवक्ता ने कहा:

  • सबसे ज़रूरी है युद्ध का तुरंत अंत

  • ऊर्जा आपूर्ति की स्थिरता सभी देशों की साझा ज़िम्मेदारी है

  • चीन संवाद और कूटनीति को प्राथमिकता देगा

यह बयान दर्शाता है कि बीजिंग सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीतिक समाधान चाहता है।


जापान का सावधान संकेत

अमेरिका का करीबी सहयोगी होने के बावजूद Japan ने तुरंत प्रतिक्रिया नहीं दी।

जापानी अधिकारियों ने कहा कि यह मुद्दा प्रधानमंत्री Sanae Takaichi की आगामी अमेरिका यात्रा के दौरान चर्चा में आ सकता है।

लेकिन जापान ने साफ कहा है कि वह केवल अमेरिकी अनुरोध के आधार पर तुरंत नौसैनिक जहाज़ नहीं भेजेगा और स्वतंत्र निर्णय लेगा।


फ्रांस ने अफ़वाहों को किया खारिज

France ने उन रिपोर्टों को खारिज कर दिया जिनमें कहा गया था कि फ्रांस अपने युद्धपोत होर्मुज़ भेज रहा है।

फ्रांस के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि उसका विमानवाहक पोत समूह अभी भी Eastern Mediterranean में तैनात है और स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

सरकार ने कहा कि उसकी सैन्य तैनाती पूरी तरह रक्षात्मक है।


दक्षिण कोरिया की चुप्पी

अब तक South Korea ने इस अपील पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सियोल इस मुद्दे पर अमेरिका के साथ रणनीतिक संतुलन और घरेलू राजनीतिक प्रभावों को ध्यान में रखते हुए निर्णय करेगा।


ईरान संकट का वैश्विक असर

मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव का असर केवल सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके सामाजिक, खेल और नागरिक जीवन पर भी असर दिखाई दे रहा है।

ईरानी महिला फुटबॉल टीम का विवाद

ईरान की महिला फुटबॉल टीम की कुछ खिलाड़ियों ने पहले Australia में शरण लेने का फैसला किया था, लेकिन बाद में तीन खिलाड़ियों—ज़हरा सुल्तान मश्केहकर, मोना हमूदी और ज़हरा सरबली—ने अपने देश लौटने का निर्णय ले लिया।

इन खिलाड़ियों ने एशियन कप मैच के दौरान राष्ट्रगान के समय चुप रहकर विरोध दर्ज कराया था, जिसके बाद ईरान में उन्हें “युद्ध के गद्दार” कहकर आलोचना का सामना करना पड़ा।


भारत पर भी असर: एयरलाइंस ने बदला संचालन

मध्य-पूर्व में युद्ध जैसे हालात का असर भारतीय हवाई सेवाओं पर भी पड़ा है।

  • Air India

  • IndiGo

दोनों एयरलाइंस ने United Arab Emirates के लिए उड़ानों में कटौती और समय परिवर्तन की घोषणा की है।

एयरलाइंस ने यात्रियों से उड़ान की स्थिति पहले जांचने की सलाह दी है।


अमेरिका की चेतावनी: 14 देशों से नागरिकों को निकलने को कहा

तनाव बढ़ने के बाद अमेरिका ने अपने नागरिकों से मध्य-पूर्व के 14 देशों को छोड़ने की सलाह दी है।

विशेष रूप से Baghdad स्थित अमेरिकी दूतावास पर मिसाइल हमले के बाद स्थिति और गंभीर हो गई।

अमेरिकी अधिकारियों ने चेतावनी दी कि क्षेत्र में ईरान समर्थित मिलिशिया समूहों से खतरा बढ़ गया है।


वैश्विक कूटनीति का कठिन मोड़

ट्रंप की अपील ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—

क्या दुनिया के बड़े देश मिलकर होर्मुज़ जलडमरूमध्य की सुरक्षा के लिए संयुक्त सैन्य अभियान शुरू करेंगे, या फिर कूटनीतिक समाधान तलाशा जाएगा?

फिलहाल प्रतिक्रियाओं से साफ है कि कई देश सीधे सैन्य हस्तक्षेप से बचना चाहते हैं।

लेकिन अगर मध्य-पूर्व में तनाव और बढ़ता है, तो Strait of Hormuz दुनिया की सबसे खतरनाक सामरिक टकराव वाली जगह बन सकता है—जिसका असर तेल की कीमतों से लेकर वैश्विक राजनीति तक हर स्तर पर दिखाई देगा।

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