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संताल सम्मेलन विवाद 2026: राष्ट्रपति मुरमू की नाराजगी से भड़का राजनीतिक तूफान – वेन्यू बदलने पर PM मोदी का 'अपमान' बयान, ममता का पलटवार; बंगाल की आदिवासी राजनीति पर गहरा असर

 नई दिल्ली 8 मार्च 2026 |✍🏻 Z S Razzaqi |वरिष्ठ पत्रकार  

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया विवाद ने तूल पकड़ लिया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुरमू ने संताल सम्मेलन (Santal Conference) के आयोजन के दौरान वेन्यू बदलने पर खुली नाराजगी जाहिर की, जिसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे 'राष्ट्रपति का अपमान' बताते हुए तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार पर हमला बोला। ममता बनर्जी ने तुरंत पलटवार किया और इसे 'प्रोटोकॉल का मामला' बताया। यह विवाद न सिर्फ संताल आदिवासी समुदाय की भावनाओं को आहत कर रहा है, बल्कि 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले बंगाल की आदिवासी राजनीति को नई दिशा दे सकता है।

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यह खबर संताल सम्मेलन विवाद 2026, राष्ट्रपति मुरमू संताल सम्मेलन नाराजगी, PM मोदी ममता अपमान बयान, बंगाल आदिवासी राजनीति और संताल हूल दिवस विवाद की ताजा अपडेट ढूंढ रहे लोगों के लिए है। हम इस लेख में घटना की पूरी पृष्ठभूमि, राजनीतिक प्रतिक्रियाओं, ऐतिहासिक संदर्भ और गहन विश्लेषण के साथ सब कुछ कवर करेंगे।

संताल सम्मेलन क्या है? – आदिवासी इतिहास का महत्वपूर्ण आयोजन

संताल सम्मेलन, जिसे 'संताल हूल सम्मेलन' भी कहा जाता है, संताल आदिवासी समुदाय का एक प्रमुख सांस्कृतिक और राजनीतिक मंच है। यह 30 जून 1855 को संताल विद्रोह (संताल हूल) की याद में मनाया जाता है, जब संताल जनजाति ने ब्रिटिश शासन और जमींदारों के शोषण के खिलाफ विद्रोह किया था। पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग और जलपाईगुड़ी जिलों में रहने वाले संताल आदिवासी (कुल जनसंख्या लगभग 25 लाख) के लिए यह सम्मेलन अपनी पहचान, अधिकार और सांस्कृतिक संरक्षण का प्रतीक है।

2026 का सम्मेलन दार्जिलिंग के सिलिगुड़ी में आयोजित होने वाला था, जहां राष्ट्रपति मुरमू (जो खुद संताल जनजाति से हैं) मुख्य अतिथि थीं। सम्मेलन का थीम था 'आदिवासी सशक्तिकरण और सांस्कृतिक संरक्षण', जिसमें 5,000 से ज्यादा संताल प्रतिनिधि भाग लेने वाले थे। लेकिन 7 मार्च को वेन्यू को अचानक सिलिगुड़ी से कोलकाता शिफ्ट कर दिया गया, जिससे विवाद भड़क गया। द हिंदू और टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट्स के अनुसार, TMC सरकार ने 'सुरक्षा कारणों' का हवाला दिया, लेकिन संताल समुदाय ने इसे 'अपमान' बताया।

क्या हुआ था 7 मार्च 2026 को? – वेन्यू शिफ्ट का पूरा घटनाक्रम

सम्मेलन की तैयारियां 15 फरवरी से चल रही थीं। राष्ट्रपति मुरमू को दार्जिलिंग में आमंत्रित किया गया था, और राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने भी हिस्सा लेना था। लेकिन 6 मार्च की शाम को TMC सरकार ने वेन्यू को कोलकाता के नेशनल लाइब्रेरी ऑडिटोरियम में शिफ्ट करने का फैसला लिया। आधिकारिक कारण: 'भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा'। लेकिन संताल नेताओं ने आरोप लगाया कि यह 'राजनीतिक दबाव' का नतीजा है, क्योंकि दार्जिलिंग में BJP का प्रभाव ज्यादा है।

7 मार्च को सिलिगुड़ी में राष्ट्रपति मुरमू पहुंचीं, लेकिन वेन्यू बदलने की खबर सुनकर नाराज हो गईं। उन्होंने स्थानीय संताल प्रतिनिधियों से कहा, "यह सम्मेलन हमारी संस्कृति का हिस्सा है। वेन्यू बदलना प्रोटोकॉल का उल्लंघन है।" यह बयान वायरल हो गया, और PM मोदी ने तुरंत ट्वीट किया: "राष्ट्रपति का अपमान अस्वीकार्य है। यह बंगाल सरकार की लापरवाही है।" ममता बनर्जी ने जवाब दिया, "यह सुरक्षा का मामला है, अपमान नहीं। राष्ट्रपति को सम्मान दिया गया।"

हिंसा की आशंका से पुलिस ने सिलिगुड़ी में कर्फ्यू लगा दिया, और 200 संताल कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। सम्मेलन कोलकाता में आयोजित हुआ, लेकिन सिर्फ 1,500 लोग पहुंचे – मूल संख्या का आधा।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: BJP का हमला, TMC का बचाव

  • BJP और NDA का रुख: PM मोदी ने इसे 'अपमानजनक' बताया और कहा, "आदिवासी बहनों का सम्मान राष्ट्र का सम्मान है। TMC आदिवासियों को नजरअंदाज कर रही है।" गृह मंत्री अमित शाह ने बंगाल सरकार पर हमला बोला: "यह प्रोटोकॉल फेलियर है। मुरमू जी की नाराजगी बंगाल की राजनीति का आईना है।" BJP के आदिवासी नेता सुकांत मजुमदार ने कहा, "संताल हूल की भावना को कुचला गया।"
  • TMC का पलटवार: ममता बनर्जी ने कहा, "राष्ट्रपति को पूरा सम्मान दिया गया। वेन्यू बदलना सुरक्षा के लिए था। BJP इसे राजनीतिक रंग दे रही है।" TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने ट्वीट किया, "मोदी जी आदिवासियों के नाम पर वोट मांगते हैं, लेकिन बंगाल में TMC ने आदिवासी कल्याण के लिए 5,000 करोड़ खर्च किए।"
  • विपक्ष की प्रतिक्रिया: CPI(M) की ब्रिंदा करात ने कहा, "यह न्यूनतम प्रोटोकॉल का उल्लंघन है। TMC को माफी मांगनी चाहिए।" कांग्रेस ने दोनों दलों पर निशाना साधा। संताल संगठनों ने TMC पर 'अपमान' का आरोप लगाया।

गहन विश्लेषण: संताल सम्मेलन विवाद के पीछे की राजनीति

यह विवाद सतही नहीं, बल्कि गहरा राजनीतिक खेल है। विश्लेषण:

  1. आदिवासी वोट बैंक का खेल: बंगाल में संताल और अन्य आदिवासी 10% वोटर हैं। 2021 चुनावों में TMC ने आदिवासी मुद्दों पर फोकस किया, लेकिन 2026 के चुनावों से पहले BJP इसे 'अपमान' बताकर आदिवासी वोट चुराना चाहती है। दार्जिलिंग में BJP का आधार मजबूत है, इसलिए वेन्यू शिफ्ट को 'TMC की साजिश' बताया जा रहा है।
  2. प्रोटोकॉल और राष्ट्रपति का रोल: राष्ट्रपति मुरमू पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति हैं, इसलिए उनका सम्मेलन में आना प्रतीकात्मक था। वेन्यू बदलना प्रोटोकॉल का उल्लंघन है (संविधान अनुच्छेद 53), लेकिन TMC का दावा है कि 'सुरक्षा' प्राथमिकता थी। स्वराज्य मैगजीन की रिपोर्ट में कहा गया कि यह 'अभूतपूर्व विवाद' है।
  3. संताल हूल का ऐतिहासिक संदर्भ: संताल विद्रोह ब्रिटिश शोषण के खिलाफ था। आज यह आदिवासी अधिकारों का प्रतीक है। विवाद से संताल समुदाय में नाराजगी बढ़ी, जो TMC के लिए नुकसानदेह है। ANI की रिपोर्ट में CPI(M) ने कहा, "यह न्यूनतम आवश्यकता का उल्लंघन है।"
  4. चुनावी प्रभाव: 2026 चुनावों में आदिवासी सीटें (दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी) निर्णायक होंगी। BJP इसे 'TMC विरोधी' नैरेटिव बना रही है, जबकि TMC 'विकास' पर फोकस करेगी। फ्री प्रेस जर्नल की रिपोर्ट में कहा गया कि विवाद से TMC की छवि प्रभावित हो सकती है।

निष्कर्ष:-

 विवाद से सबक – आदिवासी सम्मान और राजनीति का संतुलन

संताल सम्मेलन विवाद ने दिखाया कि प्रोटोकॉल का उल्लंघन राजनीतिक तूफान ला सकता है। राष्ट्रपति मुरमू की नाराजगी से TMC सरकार दबाव में है, जबकि BJP को चुनावी फायदा मिल सकता है। लेकिन असली संदेश: आदिवासी संस्कृति का सम्मान करें। बंगाल सरकार को माफी मांगनी चाहिए, और सम्मेलन को सिलिगुड़ी में दोबारा आयोजित करने का विचार करें। समाज को एकजुट होने का समय है।

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