पटना, 6 मार्च 2026 |✍🏻 Z S Razzaqi | अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक एवं वरिष्ठ पत्रकार
पृष्ठभूमि: नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर और भाजपा से रिश्ता
नीतीश कुमार बिहार के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले मुख्यमंत्री हैं, जिन्होंने 2005 से अब तक कुल 20 वर्षों तक राज्य की कमान संभाली है। उनका राजनीतिक सफर उथल-पुथल भरा रहा है – 2013 में एनडीए छोड़ना, 2015 में महागठबंधन बनाना, 2017 में वापस एनडीए में आना, 2022 में फिर छोड़ना और 2024 में पुनः वापसी। 2025 के बिहार विधानसभा चुनावों में एनडीए की भारी जीत (243 सीटें) के बाद नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद संभाला, लेकिन भाजपा ने 2025 में ही 128 सीटें जीतकर खुद को बड़ा भाई साबित कर दिया।
भाजपा और नीतीश के रिश्ते में हमेशा तनाव रहा है। 2024 में जब नीतीश एनडीए में लौटे, तो यह एक रणनीतिक गठजोड़ था – भाजपा को बिहार में मजबूत आधार मिला, और नीतीश को सत्ता। लेकिन 2025 चुनावों के बाद भाजपा में आवाजें उठने लगीं कि नीतीश की उम्र (75 वर्ष) और स्वास्थ्य समस्याओं (जो 2024 से चर्चा में हैं) के कारण सत्ता परिवर्तन जरूरी है। रिपब्लिक वर्ल्ड और हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट्स के अनुसार, नीतीश के परिवार और जेडीयू नेताओं ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन वे "प्रतिबद्ध" रहे।
2026 का बड़ा फैसला: राज्यसभा शिफ्ट और भाजपा में उथल-पुथल
5 मार्च 2026 को नीतीश कुमार ने पटना में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में राज्यसभा नामांकन दाखिल किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा, "मैं विधानसभा, विधान परिषद, लोकसभा और अब राज्यसभा का सदस्य बनना चाहता हूं।" लेकिन यह फैसला अचानक नहीं था – द इकोनॉमिक टाइम्स और द हिंदू की रिपोर्ट्स बताती हैं कि भाजपा ने नीतीश पर दबाव डाला था।
भाजपा में उठापटक के मुख्य कारण:
- सत्ता हस्तांतरण का प्लान: भाजपा बिहार में पहली बार अपना मुख्यमंत्री बनाना चाहती है। 2025 चुनावों में भाजपा की 128 सीटें जेडीयू की 102 से ज्यादा थीं, लेकिन नीतीश को सीएम बनाया गया। अब नीतीश के जाने से भाजपा के लिए मौका है। लेकिन पार्टी में बहस है – क्या OBC या EBC नेता को सीएम बनाया जाए, या कोई महिला नेता को? द हिंदू की रिपोर्ट में कहा गया कि "भाजपा का मास्टरस्ट्रोक" एक महिला सीएम हो सकती है।
- नीतीश के बेटे निशांत कुमार की भूमिका: नीतीश के जाने के बाद जेडीयू में नेतृत्व संकट है। निशांत कुमार (नीतीश के बेटे) को राजनीति में लाने की चर्चा है। ईटीवी भारत की रिपोर्ट में कहा गया कि निशांत का राजनीतिक भविष्य जेडीयू-भाजपा गठबंधन को प्रभावित कर सकता है। भाजपा में कुछ नेता इसे "वंशवाद" बताकर विरोध कर रहे हैं, जबकि अमित शाह ने नीतीश को सपोर्ट किया।
- स्वास्थ्य और उम्र का मुद्दा: मनी कंट्रोल की रिपोर्ट में कहा गया कि नीतीश की स्वास्थ्य समस्याओं (जो 2024 से चली आ रही हैं) ने जेडीयू को फैसला लेने पर मजबूर किया। भाजपा में कुछ धड़े इसे "दबाव" बताते हैं, जबकि अन्य इसे "सत्ता साझेदारी का डील" कहते हैं।
- आंतरिक मतभेद: इंडिया टुडे की रिपोर्ट में जेडीयू में फैक्शनलिज्म की बात है – कुछ नेता नीतीश के जाने से पार्टी टूटने का डर जता रहे हैं। भाजपा में भी, जो नेता नीतीश को "अस्थिर" मानते थे, अब खुश हैं, लेकिन कुर्मी-कोएरी वोट बैंक (नीतीश का आधार) खोने का डर है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: विपक्ष का हमला, एनडीए की एकता पर सवाल
- आरजेडी का आरोप: तेजस्वी यादव ने कहा, "भाजपा ने नीतीश कुमार को हाईजैक कर लिया।" इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट में तेजस्वी ने इसे "भाजपा की साजिश" बताया।
- भाजपा का बचाव: अमित शाह ने नीतीश को "एनडीए का मजबूत स्तंभ" कहा। लेकिन पार्टी में कुछ नेता (नाम गोपनीय) कहते हैं कि नीतीश की उम्र के कारण यह जरूरी था।
- जेडीयू की दुविधा: पार्टी में ललन सिंह जैसे नेता नीतीश के जाने से चिंतित हैं। ओएमएमकॉम न्यूज की रिपोर्ट में कहा गया कि जेडीयू को अब नई पीढ़ी की तैयारी करनी होगी।
गहन विश्लेषण: भाजपा की रणनीति और बिहार की राजनीति पर प्रभाव
भाजपा में यह उथल-पुथल 2024 से चल रही एनडीए की पावर-शेयरिंग डील का नतीजा है। द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में कहा गया कि 2025 चुनावों के बाद भाजपा बिहार में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है। विश्लेषण:
- भाजपा की मजबूती: बिहार में पहली बार भाजपा सीएम बनेगा, जो 2029 लोकसभा चुनावों के लिए फायदेमंद होगा। लेकिन कुर्मी वोट (नीतीश का आधार) खोने का खतरा है।
- जेडीयू का संकट: नीतीश के जाने से पार्टी टूट सकती है। निशांत कुमार अगर आते हैं तो "वंशवाद" का आरोप लगेगा।
- विपक्ष का फायदा: आरजेडी और कांग्रेस इसे "एनडीए में फूट" बताकर हमला करेंगे।
- भविष्य: यूट्यूब एनालिसिस में कहा गया कि नीतीश की राज्यसभा शिफ्ट "बिहार के चाणक्य" का अंत है, लेकिन भाजपा के लिए नया अध्याय।
निष्कर्ष:
बिहार की राजनीति में नया दौर
नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने से भाजपा में खुशी की लहर है, लेकिन आंतरिक मतभेद भी। यह फैसला स्वास्थ्य, दबाव या डील का नतीजा हो सकता है, लेकिन बिहार में सत्ता का संतुलन बदल रहा है। समाज को संदेश: राजनीतिक बदलाव शांतिपूर्ण हों। अब देखना है कि बिहार का अगला सीएम कौन बनेगा और जेडीयू का भविष्य क्या होगा।
