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Instagram DMs में End-to-End Encryption बंद करेगा Meta: 8 मई 2026 के बाद नहीं मिलेगी यह प्राइवेसी सुविधा

16 मार्च 2026 |✍🏻 Z S Razzaqi | वरिष्ठ पत्रकार  

दुनिया की सबसे बड़ी सोशल मीडिया कंपनियों में से एक Meta ने एक अहम फैसला लेते हुए अपने लोकप्रिय प्लेटफ़ॉर्म Instagram के डायरेक्ट मैसेज (DMs) में मौजूद End-to-End Encryption फीचर को बंद करने की घोषणा कर दी है। कंपनी के अनुसार यह सुविधा 8 मई 2026 के बाद इंस्टाग्राम पर उपलब्ध नहीं रहेगी।

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब दुनिया भर में डिजिटल प्राइवेसी, डेटा सुरक्षा और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही को लेकर लगातार बहस चल रही है। Meta का कहना है कि इस फीचर का इस्तेमाल बहुत कम यूज़र्स कर रहे थे, इसलिए इसे हटाने का निर्णय लिया गया है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे कानूनी दबाव, सुरक्षा चिंताएँ और तकनीकी रणनीति भी बड़ी वजह हो सकती हैं।


क्या था Instagram का End-to-End Encryption फीचर?

End-to-End Encryption (E2EE) एक ऐसा सुरक्षा सिस्टम होता है जिसमें मैसेज केवल भेजने वाले और प्राप्त करने वाले व्यक्ति ही पढ़ सकते हैं
इस तकनीक के तहत:

  • मैसेज रास्ते में किसी तीसरे व्यक्ति द्वारा नहीं पढ़े जा सकते

  • यहां तक कि प्लेटफ़ॉर्म चलाने वाली कंपनी भी संदेशों की सामग्री नहीं देख सकती

  • केवल उपयोगकर्ता के डिवाइस पर ही मैसेज डिक्रिप्ट होता है

इस तकनीक को पहले से ही WhatsApp जैसे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाता है।

Instagram पर यह सुविधा ऑप्शनल थी, यानी यूज़र चाहें तो अपने चैट को एन्क्रिप्टेड मोड में बदल सकते थे।


Meta ने यह फीचर क्यों हटाया?

Meta की प्रवक्ता Dina El-Kassaby Luce के अनुसार कंपनी ने यह निर्णय इसलिए लिया क्योंकि:

  • इस फीचर का इस्तेमाल करने वाले यूज़र्स की संख्या बेहद कम थी

  • अधिकांश लोग सामान्य DM चैट का ही उपयोग कर रहे थे

  • कम उपयोग होने वाले फीचर को बनाए रखना तकनीकी रूप से प्रभावी नहीं था

कंपनी का कहना है कि वह अपने प्लेटफॉर्म को सरल और उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाने के लिए समय-समय पर ऐसे बदलाव करती रहती है।


प्राइवेसी बनाम सुरक्षा: क्यों छिड़ी बहस?

End-to-End Encryption को लेकर टेक इंडस्ट्री में लंबे समय से विवाद रहा है।

एक तरफ डिजिटल प्राइवेसी के समर्थक मानते हैं कि यह तकनीक नागरिकों की निजी बातचीत को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी है।

दूसरी तरफ कानून प्रवर्तन एजेंसियों और बाल सुरक्षा संगठनों का तर्क है कि यह सुविधा अपराधियों को छिपकर गतिविधियां करने का मौका देती है।

कई आलोचकों का कहना है कि एन्क्रिप्टेड चैट के कारण:

  • बाल शोषण से जुड़े अपराधों का पता लगाना कठिन हो सकता है

  • आपराधिक नेटवर्क आसानी से संवाद कर सकते हैं

  • जांच एजेंसियों को सबूत जुटाने में मुश्किल होती है

यही कारण है कि कुछ टेक कंपनियां इस सुविधा को सीमित रखने की नीति अपनाती हैं।


TikTok की अलग रणनीति

दिलचस्प बात यह है कि लोकप्रिय वीडियो प्लेटफॉर्म TikTok अपने यूज़र्स के डायरेक्ट मैसेज में End-to-End Encryption प्रदान नहीं करता।

कंपनी ने पहले बताया था कि यह निर्णय यूज़र सुरक्षा और मॉडरेशन को ध्यान में रखकर लिया गया है। TikTok का मानना है कि चैट डेटा तक सीमित एक्सेस होने से:

  • प्लेटफॉर्म पर संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी आसान होती है

  • कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ सहयोग संभव होता है

  • नाबालिगों की सुरक्षा बेहतर की जा सकती है


WhatsApp और Messenger में अभी भी रहेगा एन्क्रिप्शन

हालांकि Instagram से यह फीचर हटाया जा रहा है, लेकिन Meta ने साफ किया है कि End-to-End Encryption पूरी तरह खत्म नहीं हो रहा।

  • WhatsApp में यह पहले की तरह मौजूद रहेगा

  • Messenger में भी एन्क्रिप्टेड चैट का विकल्प जारी रहेगा

Meta ने उन यूज़र्स को सलाह दी है जो अधिक सुरक्षित मैसेजिंग चाहते हैं, वे WhatsApp या Messenger का उपयोग कर सकते हैं।


क्या यूज़र्स की प्राइवेसी पर पड़ेगा असर?

विशेषज्ञों का कहना है कि Instagram DMs से End-to-End Encryption हटने के बाद:

  • प्लेटफॉर्म पर भेजे गए मैसेज तकनीकी रूप से कंपनी के सर्वर पर उपलब्ध रह सकते हैं

  • सुरक्षा और मॉडरेशन के लिए डेटा की समीक्षा संभव होगी

  • लेकिन इससे कुछ यूज़र्स को अपनी डिजिटल प्राइवेसी को लेकर चिंता हो सकती है

हालांकि Meta का दावा है कि वह यूज़र डेटा सुरक्षा के वैश्विक मानकों का पालन करता रहेगा।


डिजिटल दुनिया का बदलता संतुलन

Instagram से End-to-End Encryption हटाने का फैसला यह दिखाता है कि टेक कंपनियां आज प्राइवेसी और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की चुनौती से जूझ रही हैं।

एक ओर यूज़र्स अपने निजी संवाद की सुरक्षा चाहते हैं, वहीं सरकारें और सुरक्षा एजेंसियां ऑनलाइन अपराधों को रोकने के लिए अधिक निगरानी की मांग करती हैं।

आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म यूज़र प्राइवेसी, कानूनी जिम्मेदारी और तकनीकी नवाचार के बीच किस तरह संतुलन बनाते हैं।

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