21 फरवरी 2026 |✍🏻 Z S Razzaqi | अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक एवं वरिष्ठ पत्रकार
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, 2003 में इराक पर अमेरिकी हमले के बाद से मध्य पूर्व में अमेरिका की यह सबसे बड़ी सैन्य तैनाती है। दो एयरक्राफ्ट कैरियर, दर्जनों युद्धपोत, फाइटर जेट्स और हजारों सैनिक पहले से ही क्षेत्र में हैं। ट्रंप प्रशासन ने इसे “अंतिम विकल्प” बताया है, लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को साफ चेतावनी दी कि ईरान को परमाणु कार्यक्रम पर “अर्थपूर्ण समझौता” करना होगा – वरना “बहुत बुरा होगा”। उन्होंने 10-15 दिनों की समय सीमा का संकेत दिया।
ईरान ने इसे “सैन्य आक्रामकता का स्पष्ट खतरा” करार दिया और UN सुरक्षा परिषद को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। तेहरान ने कहा कि अगर हमला हुआ तो क्षेत्र में अमेरिका की सभी सैन्य आधारें, सुविधाएं और संपत्तियां “वैध लक्ष्य” होंगी।
बातचीत ठप: जेनेवा में प्रगति दिखी, लेकिन मूल मुद्दे पर गतिरोध
ओमान की मध्यस्थता में दो दौर की अप्रत्यक्ष बातचीत (फरवरी 2026 में) हुईं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने जेनेवा बैठक के बाद कहा कि दोनों पक्ष “मार्गदर्शक सिद्धांतों” पर सहमत हुए हैं और ईरान जल्द ही लिखित प्रस्ताव देगा। लेकिन व्हाइट हाउस ने इसे “अभी भी काफी दूरी” बताया।
मुख्य गतिरोध के मुद्दे:
- यूरेनियम संवर्धन: अमेरिका की मांग – ईरान की जमीन पर कोई संवर्धन नहीं। ईरान इसे संप्रभु अधिकार मानता है।
- बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम: अमेरिका इसे रोकना चाहता है; ईरान चर्चा से इनकार।
- प्रॉक्सी मिलिशिया: हूती, हिजबुल्लाह, हशद अल-शाबी आदि पर अमेरिका चिंतित, लेकिन ईरान ने इसे बातचीत में शामिल नहीं किया।
- प्रतिबंध हटाना: ईरान पूर्ण राहत मांगता है; अमेरिका चरणबद्ध राहत पर अड़ा।
एक सूत्र ने बताया कि अमेरिका ने मिसाइल संबंधी प्रस्तावों वाला लिफाफा भेजा, लेकिन अरागची ने उसे खोला भी नहीं और लौटा दिया।
ट्रंप की दुविधा: सैन्य ताकत दिखाई, अब पीछे हटना मुश्किल
ट्रंप ने क्षेत्र में इतनी बड़ी तैनाती की है कि अब बिना मजबूत समझौते के वापस बुलाना “चेहरा खोना” माना जाएगा। पूर्व अमेरिकी राजनयिक एलन आयर ने कहा, “ट्रंप को लगता है कि इतनी ताकत इकट्ठी करने के बाद कमजोर समझौता करके वापस लौटना उनके लिए शर्मिंदगी होगी। अगर हमला हुआ तो स्थिति बहुत तेजी से बिगड़ जाएगी।”
ट्रंप ने शुक्रवार को कहा, “मैं हमले पर विचार कर रहा हूं।” लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि यह “सीमित हमला” हो सकता है ताकि ईरान को समझौते पर मजबूर किया जा सके।
इजरायल और गल्फ देशों की तैयारी
- इजरायल: दो इजरायली अधिकारी ने बताया कि तेहरान और वाशिंगटन के बीच गैप “पूरा नहीं हो सकता”। जून 2025 के अमेरिका-इजरायल संयुक्त हमलों के बाद अब दूसरी कार्रवाई की तैयारी है। 28 फरवरी को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और नेतन्याहू की बैठक में ईरान मुद्दा प्रमुख होगा।
- गल्फ देश: सऊदी अरब, UAE, बहरीन आदि युद्ध की तैयारी कर रहे हैं। वे डरते हैं कि संघर्ष हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर देगा, जहां से दुनिया का 20% तेल गुजरता है। तेल की कीमतें पहले ही बढ़ चुकी हैं।
- यूरोप: यूरोपीय राजनयिकों का कहना है कि अमेरिका को स्पष्ट करना चाहिए कि हमले का उद्देश्य क्या है – परमाणु क्षमता कम करना, मिलिशिया रोकना, या “शासन परिवर्तन”।
क्या होगा अगर बातचीत फेल हुई?
- अमेरिकी रक्षा विश्लेषक डेविड डेस रोचेस के अनुसार, हमला पहले ईरान की एयर डिफेंस को अंधा करेगा, फिर IRGC नेवी (रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स नौसेना) पर हमला होगा – जो पिछले सालों में टैंकर हमलों और हॉर्मुज बंद करने की धमकियों के लिए जिम्मेदार है।
- कई विशेषज्ञों का मानना है कि सैन्य कार्रवाई से “शासन परिवर्तन” नहीं होगा। सुप्रीम लीडर अली खामेनी और IRGC की पकड़ मजबूत है। कोई वैकल्पिक राजनीतिक ताकत नहीं दिखती।
- हमला शुरू करना आसान हो सकता है, लेकिन नियंत्रित करना और रणनीतिक नतीजा निकालना बहुत मुश्किल।
ईरान का रुख: समझौता संभव, लेकिन लाल रेखा पर नहीं
- अली लारिजानी (खामेनी के करीबी सलाहकार) ने अल जजीरा को बताया कि ईरान IAEA से व्यापक मॉनिटरिंग की अनुमति दे सकता है ताकि साबित हो कि परमाणु हथियार नहीं बना रहा।
- ईरान IAEA प्रमुख रफाएल ग्रॉसी को सूचित कर चुका है।
- लेकिन संवर्धन और मिसाइल को “संप्रभु अधिकार” मानकर चर्चा से इनकार।
निष्कर्ष:-
युद्ध की छाया, लेकिन आखिरी मौका बाकी
अमेरिका और ईरान दोनों अपनी-अपनी लाल रेखाओं पर अड़े हैं। ट्रंप की सैन्य ताकत और ईरान की चुनौतीपूर्ण मुद्रा दोनों पक्षों को पीछे हटने नहीं दे रही। अगले 10-15 दिन निर्णायक हैं। अगर ईरान लिखित प्रस्ताव देता है और अमेरिका उस पर गंभीरता से विचार करता है, तो टकराव टल सकता है। अन्यथा, मध्य पूर्व में नया युद्ध शुरू हो सकता है – जिसके परिणाम वैश्विक अर्थव्यवस्था, तेल बाजार और क्षेत्रीय स्थिरता पर भारी पड़ेंगे।
दुनिया की नजर अब ट्रंप के अगले बयान, ईरान के प्रस्ताव और इजरायल-अमेरिका की बैठक पर है।
