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ट्रंप का ईरान को 10-15 दिन का अल्टीमेटम: अमेरिका ‘सैन्य संकट’ मोल ले रहा, ईरान ने UNSC से तत्काल कार्रवाई की मांग की – पूर्ण विश्लेषण

20 फरवरी 2026 |✍🏻 Z S Razzaqi | अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक एवं वरिष्ठ पत्रकार 

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को ईरान को साफ चेतावनी देते हुए कहा कि तेहरान के पास “अर्थपूर्ण डील” करने के लिए सिर्फ 10 से 15 दिन बाकी हैं। अगर यह समय सीमा पूरी नहीं हुई तो “बहुत बुरा हो सकता है”। इसी दौरान ईरान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) और महासचिव एंटोनियो गुटेरेस को पत्र लिखकर ट्रंप की इन टिप्पणियों को “सैन्य आक्रामकता का वास्तविक खतरा” करार दिया और तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।

यह घटनाक्रम ठीक उसी समय सामने आया जब ट्रंप वॉशिंगटन में अपनी नई पहल Board of Peace की पहली बैठक की मेजबानी कर रहे थे। इस बैठक में दुनिया भर के दर्जनों नेताओं को आमंत्रित किया गया था, लेकिन ईरान मुद्दा बैठक का सबसे बड़ा फोकस बन गया।

ईरान का UN में सख्त रुख: “हम युद्ध नहीं चाहते, लेकिन हमला हुआ तो जवाब देंगे”

ईरान के संयुक्त राष्ट्र राजदूत अमीर सईद इरावानी ने 19 फरवरी को UNSC और महासचिव को लिखे पत्र में कहा कि ट्रंप की हालिया टिप्पणियां “क्षेत्र में अस्थिरता और अमेरिका द्वारा सैन्य उपकरणों के भारी जमावड़े” को देखते हुए “केवल बयानबाजी नहीं” हैं। उन्होंने खासतौर पर ट्रंप के उस बयान का जिक्र किया जिसमें उन्होंने ब्रिटेन के नियंत्रण वाले चागोस द्वीप समूह (भारतीय महासागर) में स्थित डिएगो गार्सिया एयरफील्ड का इस्तेमाल ईरान पर संभावित हमले के लिए करने की बात कही थी।

इरावानी ने लिखा, “अगर अमेरिका ने सैन्य आक्रामकता की, तो ईरान अपने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत आत्मरक्षा का अधिकार इस्तेमाल करेगा। क्षेत्र में अमेरिका की सभी बेस, सुविधाएं और संपत्तियां ईरान के लिए वैध लक्ष्य होंगी। अमेरिका को इसके अप्रत्याशित और अनियंत्रित परिणामों की पूरी जिम्मेदारी खुद उठानी होगी।”

ईरान ने साफ कहा कि वह न तो तनाव चाहता है और न ही युद्ध की शुरुआत करेगा, लेकिन हमला होने पर “निश्चित और आनुपातिक” जवाब दिया जाएगा।

ट्रंप का अल्टीमेटम: “10-15 दिन काफी हैं, वरना बुरा होगा”

Board of Peace की बैठक में बोलते हुए ट्रंप ने कहा, “ईरान के साथ अर्थपूर्ण डील करनी होगी। वरना बहुत बुरा होगा। अब हम एक कदम और आगे बढ़ सकते हैं या नहीं भी। शायद हम डील कर लेंगे। अगले 10 दिनों में आपको पता चल जाएगा।”

एयर फोर्स वन पर पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने और स्पष्ट किया, “मुझे लगता है 10-15 दिन काफी होंगे, ज्यादा से ज्यादा।”

ट्रंप ने यह भी दोहराया कि जून 2025 में अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमलों ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को नुकसान पहुंचाया और गाजा में सीजफायर का रास्ता खोला। उन्होंने दावा किया कि अगर ईरान पर हमला नहीं होता तो क्षेत्रीय देश शांति समझौते पर सहमत नहीं होते।

हालिया बातचीत में प्रगति, फिर भी सैन्य जमावड़ा जारी

यह अल्टीमेटम ठीक उसी समय आया जब 17 फरवरी को जेनेवा में अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत का दूसरा दौर पूरा हुआ था। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा था कि दोनों पक्ष “मार्गदर्शक सिद्धांतों” पर व्यापक सहमति तक पहुंच गए हैं और आगे के ड्राफ्ट पर काम शुरू हो गया है।

ट्रंप ने भी अपने दूत स्टीव विटकोफ और जारेड कुश्नर की तारीफ की और कहा कि ईरान के प्रतिनिधियों के साथ “बहुत अच्छी बैठकें” हुई हैं।

लेकिन बातचीत के सकारात्मक संकेतों के बावजूद अमेरिका ने फारस की खाड़ी में सैन्य ताकत बढ़ा दी है। दो एयरक्राफ्ट कैरियर, दर्जनों फाइटर जेट्स और अन्य सैन्य उपकरण पहले से ही तैनात हैं। ईरानी सर्वोच्च नेता अली खामेनी ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा, “अमेरिका कहता है कि उसने ईरान की ओर युद्धपोत भेज दिया है। लेकिन उस युद्धपोत को समुद्र में डुबोने वाला हथियार उससे भी ज्यादा खतरनाक है।”

पृष्ठभूमि: 2025 के हमलों से शुरू हुआ नया दौर

दिसंबर 2025 में इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के वॉशिंगटन दौरे के दौरान ट्रंप ने कहा था कि अगर ईरान अपने परमाणु या मिसाइल कार्यक्रम को फिर से मजबूत करने की कोशिश करेगा तो अमेरिका दोबारा हमला करेगा। इसके कुछ दिन बाद ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन शुरू हुए, जिन्हें ट्रंप ने समर्थन दिया।

जनवरी 2026 में ट्रंप ने कहा था कि ईरान ने अमेरिकी दबाव में असहमतियों की फांसी रोक दी है। इसके बाद ओमान में पहली अप्रत्यक्ष बातचीत हुई और अब जेनेवा में दूसरा दौर।

क्षेत्रीय और वैश्विक प्रभाव: तेल की कीमतें बढ़ीं, दुनिया चिंतित

यह तनाव मध्य पूर्व की अस्थिरता को और बढ़ा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बातचीत विफल हुई और अमेरिका ने हमला किया तो:

  • तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं
  • हॉर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने का खतरा
  • लेबनान, यमन, इराक में ईरान समर्थित गुटों की प्रतिक्रिया
  • वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर

Board of Peace की बैठक में ट्रंप ने गाजा पुनर्निर्माण के लिए 10 अरब डॉलर देने की घोषणा की और अन्य देशों से 7 अरब डॉलर का योगदान बताया। लेकिन बैठक की चर्चा में ईरान मुद्दा छा गया।

निष्कर्ष:-

 कूटनीति या टकराव?

ईरान बार-बार कह रहा है कि वह परमाणु हथियार नहीं चाहता और बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन अमेरिकी दबाव और सैन्य जमावड़े को “धमकी” मान रहा है। अमेरिका का रुख साफ है – ईरान को परमाणु क्षमता हासिल नहीं करने दी जाएगी, चाहे डिप्लोमेसी से हो या अन्य विकल्प से।

अगले 10-15 दिन निर्णायक साबित हो सकते हैं। दुनिया की नजर अब UNSC की प्रतिक्रिया, ईरान की अगली चाल और ट्रंप के अंतिम फैसले पर है।


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