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पाकिस्तान–अफगानिस्तान सीमा पर जंग जैसी स्थिति: दुनिया ने दिखाई चिंता, संयम की अपील तेज

27 फरवरी 2026 |✍🏻 Z S Razzaqi | अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक एवं वरिष्ठ पत्रकार  

दक्षिण एशिया एक बार फिर बड़े भू-राजनीतिक तनाव के केंद्र में है। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पार हमलों, हवाई बमबारी और तीखे बयानबाज़ी के बाद हालात “खुले युद्ध” जैसी स्थिति में पहुँच गए हैं। 27 फरवरी 2026 को पाकिस्तान ने सार्वजनिक रूप से कहा कि वह अब अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के साथ “ओपन वॉर” की स्थिति में है। इसके कुछ ही घंटों पहले काबुल और कंधार में धमाकों की आवाज़ें सुनी गईं और सीमा क्षेत्र में तेज़ सैन्य गतिविधि दर्ज की गई।

यह ताज़ा संघर्ष कई महीनों से चल रहे जवाबी हमलों और सीमा पर बढ़ते तनाव का परिणाम बताया जा रहा है। दोनों देशों के बीच खिंची ऐतिहासिक ड्यूरंड रेखा (Durand Line) फिर एक बार सैन्य टकराव का केंद्र बन गई है।


सीमा पर क्या हुआ? ताज़ा घटनाक्रम का विस्तृत ब्यौरा

पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने घोषणा की कि पाकिस्तान ने काबुल, कंधार और पकतिका प्रांत में लक्षित हवाई हमले किए हैं। इस दौरान अफगान राजधानी में धमाके और लड़ाकू विमानों की आवाज़ें सुनी गईं।

दूसरी ओर, तालिबान के प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने दावा किया कि अफगान बलों ने ड्यूरंड रेखा के पास पाकिस्तानी सेना के खिलाफ “बड़े पैमाने पर आक्रामक अभियान” शुरू किया है। तालिबान का कहना है कि यह कार्रवाई पाकिस्तान द्वारा पहले किए गए हवाई हमलों के जवाब में की गई।

इस संघर्ष ने सीमावर्ती इलाकों—खासतौर पर चमन और स्पिन बोल्डक—में नागरिकों के बीच भय और असुरक्षा की भावना बढ़ा दी है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, कई परिवार सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं।


वैश्विक प्रतिक्रिया: संयम, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय कानून की अपील

संयुक्त राष्ट्र की चिंता

United Nations के महासचिव Antonio Guterres ने स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उनके प्रवक्ता ने कहा कि दोनों देशों को अंतरराष्ट्रीय कानून, विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पालन करना चाहिए और नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

संयुक्त राष्ट्र ने संकेत दिया है कि यदि संघर्ष बढ़ता है तो क्षेत्रीय स्थिरता और मानवीय संकट की आशंका गंभीर हो सकती है।

ईरान की मध्यस्थता की पेशकश

Iran के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने रमज़ान के पवित्र महीने का हवाला देते हुए दोनों देशों से आत्मसंयम और इस्लामी एकजुटता की भावना अपनाने की अपील की। उन्होंने काबुल और इस्लामाबाद के बीच रचनात्मक संवाद को बढ़ावा देने के लिए हर संभव सहयोग देने की पेशकश की।

रूस और चीन की प्रतिक्रिया

Russia ने सीमा पार हमलों को तुरंत रोकने और विवादों को कूटनीतिक माध्यम से सुलझाने की सलाह दी है। रूसी विदेश मंत्रालय ने आवश्यकता पड़ने पर मध्यस्थता का संकेत भी दिया।

China ने भी सीमा पर बढ़ते तनाव पर “गहरी चिंता” जताई है। बीजिंग पहले भी क्षेत्रीय स्थिरता के लिए दोनों पक्षों के साथ संवाद करता रहा है। चीन ने कहा कि वह हालात को शांत करने में रचनात्मक भूमिका निभाने को तैयार है।


पाकिस्तान का रुख: “अब निर्णायक कार्रवाई”

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने तालिबान पर आतंकवाद और अस्थिरता को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि इस्लामाबाद ने पहले कूटनीतिक प्रयासों के ज़रिए हालात को नियंत्रित करने की कोशिश की, लेकिन “धैर्य की सीमा समाप्त हो चुकी है।”

सरकार का दावा है कि पाकिस्तानी सशस्त्र बल “निर्णायक जवाब” दे रहे हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।


अफगानिस्तान की प्रतिक्रिया: “आक्रामकता का साहस से जवाब”

अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति Hamid Karzai ने कहा कि अफगान जनता अपने वतन की रक्षा के लिए एकजुट है और किसी भी बाहरी आक्रामकता का “साहसपूर्वक” सामना करेगी। उन्होंने पाकिस्तान से अपनी नीतियों में बदलाव कर “अच्छे पड़ोसी” का मार्ग अपनाने की अपील की।

तालिबान नेतृत्व का आरोप है कि पाकिस्तान के हमलों से नागरिक क्षेत्रों को नुकसान हुआ है, हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।


भू-राजनीतिक विश्लेषण: दक्षिण एशिया के लिए क्या मायने?

  1. क्षेत्रीय अस्थिरता का खतरा – यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो यह पूरे दक्षिण एशिया और मध्य एशिया की सुरक्षा संरचना को प्रभावित कर सकता है।

  2. आर्थिक प्रभाव – सीमा बंद होने या व्यापारिक मार्ग बाधित होने से दोनों देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा।

  3. आतंकी नेटवर्क का जोखिम – बढ़ते सैन्य तनाव का फायदा चरमपंथी समूह उठा सकते हैं।

  4. महाशक्तियों की भूमिका – चीन, रूस और ईरान जैसे देश मध्यस्थता के माध्यम से क्षेत्रीय प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर सकते हैं।


क्या कूटनीति बचेगी या संघर्ष बढ़ेगा?

विशेषज्ञों का मानना है कि “ओपन वॉर” जैसे शब्दों का इस्तेमाल स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है, लेकिन पूर्ण युद्ध की संभावना अभी भी अंतरराष्ट्रीय दबाव और कूटनीतिक हस्तक्षेप के कारण टल सकती है।

संयुक्त राष्ट्र और क्षेत्रीय शक्तियों की सक्रियता इस बात का संकेत है कि वैश्विक समुदाय नहीं चाहता कि यह टकराव व्यापक युद्ध में बदले। आने वाले 48 से 72 घंटे निर्णायक साबित हो सकते हैं।


निष्कर्ष:-

पाकिस्तान–अफगानिस्तान सीमा पर भड़की यह हिंसा सिर्फ दो देशों का मामला नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की शांति और स्थिरता से जुड़ा प्रश्न है। दुनिया भर से संयम और संवाद की अपीलें इस बात को रेखांकित करती हैं कि सैन्य टकराव का कोई स्थायी समाधान नहीं होता।

अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या दोनों पक्ष कूटनीति का रास्ता चुनेंगे या दक्षिण एशिया एक और लंबे संघर्ष की ओर बढ़ेगा।

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