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India AI Summit 2026: गलगोटियास यूनिवर्सिटी का चाइनीज रोबोट डॉग घोटाला: सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव जवाब दें ?

 19 फरवरी 2026 |✍🏻 Z S Razzaqi | अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक एवं वरिष्ठ पत्रकार 

 नई दिल्ली, 19 फरवरी 2026 – भारत मंडपम में चल रहा इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 (16-21 फरवरी) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वैश्विक मंच पर भारत को AI सुपरपावर घोषित करने का दावा था। 10,000 करोड़ रुपये की IndiaAI Mission, 38,000 GPUs, 12 फाउंडेशन मॉडल्स, ग्लोबल लीडर्स और 100+ देशों के डेलिगेट्स के साथ यह समिट 'मेक इन इंडिया' और 'विकसित भारत 2047' का प्रतीक बनना था। लेकिन एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी ने इसे राष्ट्रीय शर्म में बदल दिया। गलगोटियास यूनिवर्सिटी (ग्रेटर नोएडा) ने अपने स्टॉल पर चीनी कंपनी Unitree Robotics का रेडीमेड Go2 रोबोट डॉग (कीमत लगभग 1.3-2.5 लाख रुपये) रखा, नाम रखा “Orion”, और DD News को बताया – “यह हमारे सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में डेवलप किया गया है”।

प्रोफेसर नेहा सिंह (कम्युनिकेशन विभाग) का यह इंटरव्यू वायरल होते ही सोशल मीडिया ने पोल खोल दी। तकनीकी विशेषज्ञों ने तुरंत साबित कर दिया कि यह कोई स्वदेशी इनोवेशन नहीं, बल्कि चीन से आयातित कमर्शियल प्रोडक्ट है। 18 फरवरी को MeitY ने स्टॉल की बिजली काट दी, पवेलियन खाली करा दिया और यूनिवर्सिटी को तुरंत एक्सपो से बाहर कर दिया। अंतरराष्ट्रीय मीडिया – AP News, BBC, Al Jazeera, Bloomberg – ने इसे भारत की AI महत्वाकांक्षा पर तमाचा बताया।

घटना की विस्तृत टाइमलाइन

  • 16-17 फरवरी: समिट एक्सपो शुरू। गलगोटियास स्टॉल पर “Orion” रोबोट डॉग ट्रिक्स दिखाता – कैमरे को वेव करता, उछलता।
  • 17 फरवरी: प्रोफेसर नेहा सिंह DD News को इंटरव्यू देती हैं – “You need to meet Orion… यह हमारे Centre of Excellence में डेवलप किया गया है।”
  • 18 फरवरी सुबह: वीडियो वायरल। ट्विटर/एक्स पर #GalgotiasRobotDog ट्रेंड। यूनिवर्सिटी पर फर्जीवाड़े के आरोप।
  • 18 फरवरी दोपहर: MeitY अधिकारियों ने स्टॉल खाली करने का आदेश। यूनिवर्सिटी स्टाफ ने सामान समेटा।
  • 18 फरवरी शाम: यूनिवर्सिटी का आधिकारिक बयान – माफी + प्रोफेसर पर दोषारोपण।
  • 19 फरवरी: IT मंत्री अश्विनी वैष्णव का बयान – “गलत करने वाले पर तुरंत कार्रवाई हुई… अच्छे सॉल्यूशंस भी देखें।”

गलगोटियास यूनिवर्सिटी का बचाव – दोष प्रोफेसर पर?

यूनिवर्सिटी ने कहा: “प्रोफेसर ill-informed थीं, कैमरे के सामने उत्साह में factually incorrect बोल गईं। उन्हें मीडिया से बात करने की अनुमति नहीं थी। हमने कभी रोबोट बनाने का दावा नहीं किया – यह स्टूडेंट्स के AI प्रोग्रामिंग लर्निंग टूल के रूप में Unitree से लिया गया था।”

प्रोफेसर नेहा सिंह ने PTI को बताया: “शायद मैंने सही से एक्सप्रेस नहीं किया… Your 6 can be my 9… बहुत एनर्जी में बोल दिया।”

लेकिन सवाल यह है – एक कम्युनिकेशन प्रोफेसर AI सेंटर के बारे में इतनी बड़ी गलती कैसे कर सकती है? और अगर यह सिर्फ “एंथुजियाज्म” था, तो स्टॉल पर बोर्ड, ब्रोशर या प्रेजेंटेशन में क्या लिखा था? यूनिवर्सिटी ने EoI फॉर्म में क्या दावा किया था कि MeitY ने स्टॉल अलॉट किया?

सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव को कटघरे में खड़ा करने के 10 सवाल

  1. स्टॉल की मंजूरी किसने दी? MeitY ने Expression of Interest (EoI) रिव्यू किया, 9,000 रुपये प्रति वर्ग मीटर चार्ज लिया, बूथ अलॉट किया। कोई प्री-वेरिफिकेशन? कोई तकनीकी ऑडिट? क्या हर एग्जिबिटर से प्रोडक्ट का ओरिजिनल डेवलपमेंट प्रूफ मांगा गया?
  2. मंत्री जी ने खुद वीडियो शेयर क्यों किया? विवाद से पहले अश्विनी वैष्णव ने प्रोफेसर नेहा सिंह का वीडियो अपने ऑफिशियल X अकाउंट पर शेयर किया। बाद में डिलीट? क्या यह प्रमोशन था या सिर्फ “एग्जिबिशन” का हिस्सा? PIB ने फैक्ट-चेक किया कि मंत्री ने “इंडियन रोबोट” नहीं कहा, लेकिन शेयर क्यों किया जब समिट Make in India का था?
  3. MeitY के टेक्नोक्रेट्स सोए हुए थे? सेक्रेटरी एस. कृष्णन ने कहा – “मिसइंफॉर्मेशन को बढ़ावा नहीं दे सकते।” लेकिन वायरल होने के बाद! स्टॉल विजिट टीम, सिक्योरिटी, मीडिया सेल – क्या कोई चेक नहीं करता था कि जो प्रोडक्ट दिखाया जा रहा है, वो वाकई यूनिवर्सिटी का है या नहीं?
  4. राजनीतिक दबाव था? विपक्ष (CPI(M) सांसद जॉन ब्रिटास, RJD, कांग्रेस) ने आरोप लगाया – गलगोटियास यूनिवर्सिटी BJP नेताओं की पसंदीदा है। चांसलर सुनील गलगोटिया को 2014 में मोदी सरकार का DQ ICT अवॉर्ड। BJP स्पोक्सपर्सन संभित पात्रा, पीयूष गोयल, UP CM योगी आदित्यनाथ ने यूनिवर्सिटी के कार्यक्रमों में शिरकत की। क्या इसी पैट्रोनेज की वजह से EoI में सख्ती नहीं बरती गई?
  5. 10,000 करोड़ की IndiaAI Mission का क्या? समिट इसी मिशन का हिस्सा है। अगर एक चाइनीज रोबोट को “Orion” नाम देकर पेश किया जा सकता है, तो बाकी 11 फाउंडेशन मॉडल्स और 38,000 GPUs पर कितना भरोसा करें?
  6. अंतरराष्ट्रीय शर्मिंदगी का जिम्मेदार कौन? BBC, AP, Al Jazeera ने लिखा – “भारत AI समिट पर चाइनीज रोबोट को अपना बताकर फजीहत झेल रहा है।” क्या यह वैश्विक इमेज का नुकसान नहीं?
  7. एग्जिबिटर गाइडलाइंस कहाँ थीं? MeitY ने अब चेतावनी जारी की – “एग्जिबिटर्स अपने प्रोडक्ट ही दिखाएं।” लेकिन पहले क्यों नहीं? क्या यह रिएक्टिव एक्शन है, प्रोएक्टिव नहीं?
  8. प्रोफेसर पर कार्रवाई क्यों नहीं? यूनिवर्सिटी ने दोषारोपण कर दिया, लेकिन MeitY ने यूनिवर्सिटी को सजा दी। असली जिम्मेदार कौन?
  9. अगले समिट में दोबारा होगा? क्या अब हर स्टॉल पर ब्लॉकचेन-बेस्ड वेरिफिकेशन या थर्ड-पार्टी ऑडिट लगेगा?
  10. मंत्री जी, जवाब दीजिए – क्या आपकी मंत्रालय की नाक के नीचे यह फर्जीवाड़ा हुआ क्योंकि यूनिवर्सिटी “BJP फ्रेंडली” थी? या फिर पूरी सिस्टम में लापरवाही है?

गहन विश्लेषण: सिर्फ एक कांड नहीं, सिस्टमिक विफलता

यह विवाद सिर्फ गलगोटियास का नहीं। यह दर्शाता है कि प्राइवेट यूनिवर्सिटीज PR और फंडिंग के चक्कर में असली इनोवेशन की बजाय शॉर्टकट अपनाती हैं। गलगोटियास NIRF में 101-150 बैंड में है, लॉ में 36वें, लेकिन AI में “Orion” जैसा शो-ऑफ?

दूसरी ओर, MeitY और IndiaAI Mission CEO अभिषेक सिंह जैसे अधिकारी “कंट्रोवर्सी अवॉइड” करने में लगे हैं, लेकिन मूल समस्या – वेरिफिकेशन की कमी – पर चुप्पी। समिट का मकसद था इंडिजीनस AI दिखाना, लेकिन एक चाइनीज डॉग ने सब बर्बाद कर दिया।

विपक्ष का आरोप सही लगता है – अगर राजनीतिक कनेक्शन नहीं होते, तो शायद EoI रिजेक्ट हो जाता। RJD ने तो “देशद्रोह” का केस तक मांगा।

निष्कर्ष:-

 जवाबदेही का वक्त आ गया है

सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव को संसद में या प्रेस कॉन्फ्रेंस में विस्तार से जवाब देना चाहिए। MeitY को पूरी EoI प्रक्रिया की जांच करानी चाहिए। गलगोटियास यूनिवर्सिटी को सबक मिल गया, लेकिन देश को AI में विश्वसनीयता खोने का खतरा है।

मेक इन इंडिया सिर्फ बैनर पर नहीं, स्टॉल पर भी साबित होना चाहिए। अगर टेक्नोक्रेट्स और राजनेता मिलकर फर्जीवाड़े को पनाह देते रहेंगे, तो 2047 का विकसित भारत सिर्फ सपना रहेगा।

MeitY, जवाब दीजिए। देश देख रहा है।

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