ढाका, 17 फरवरी 2026:✍🏻 Z S Razzaqi | अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक एवं वरिष्ठ पत्रकार
बांग्लादेश की राजनीतिक यात्रा आज एक निर्णायक पड़ाव पर पहुँची, जब आम चुनावों के बाद नए निर्वाचित सांसदों (Members of Parliament) ने शपथ ली और इसके साथ ही एक अप्रत्याशित लेकिन दूरगामी महत्व की घोषणा — “संविधान सुधार आयोग” (Constitution Reform Commission) — को लेकर भी शपथ की प्रक्रिया संपन्न हुई। चुनाव आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार, शपथ ग्रहण समारोह सुबह 10 बजे आयोजित हुआ, जबकि दोपहर बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के अध्यक्ष तारिक़ रहमान के नेतृत्व में नई कैबिनेट ने पद एवं गोपनीयता की शपथ ली।
यह घटनाक्रम केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि शासन-व्यवस्था के संभावित पुनर्संतुलन और संवैधानिक ढाँचे में व्यापक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
सांसदों के लिए अप्रत्याशित मोड़: संविधान सुधार आयोग पर असहजता
नए सांसदों के शपथ ग्रहण के साथ-साथ संविधान सुधार आयोग के लिए शपथ की घोषणा ने राजनीतिक हलकों में जिज्ञासा और आश्चर्य दोनों पैदा किए। कई नव-निर्वाचित MPs के बीच इस बात को लेकर असहजता सामने आई कि आयोग से संबंधित शपथ की पूर्व जानकारी स्पष्ट रूप से साझा नहीं की गई थी। अनौपचारिक प्रतिक्रियाओं में कुछ सांसदों ने संस्थागत प्रक्रियाओं की पारदर्शिता और भूमिकाओं की स्पष्टता पर सवाल उठाए।
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, 12 फरवरी 2026 को हुए जनमत-संग्रह (रेफरेंडम) में बहुमत ‘हाँ’ मिलने के परिणामस्वरूप एक विशेष संवैधानिक व्यवस्था लागू हुई है, जिसके तहत पूरी संसद 180 दिनों के लिए संविधान सुधार आयोग के रूप में कार्य करेगी। इस व्यवस्था का आशय है कि सभी सांसद न केवल विधायी कार्य करेंगे, बल्कि संविधान में संभावित संशोधनों, संस्थागत सुधारों और शासन संरचना से जुड़े विषयों पर भी विचार-विमर्श में प्रत्यक्ष भूमिका निभाएँगे।
यह मॉडल बांग्लादेश की संसदीय परंपरा में एक अनूठा प्रयोग है, जो अवसरों और चुनौतियों दोनों को साथ लेकर आता है। अवसर इस रूप में कि सुधार-प्रक्रिया सीधे निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा संचालित होगी; चुनौती इस रूप में कि विधायी प्राथमिकताओं और सुधार-कार्य के बीच संतुलन साधना होगा।
नई सरकार का गठन: BNP नेतृत्व और प्रशासनिक एजेंडा
दोपहर बाद हुए शपथ ग्रहण में BNP सरकार के गठन के साथ सत्ता का औपचारिक हस्तांतरण संपन्न हुआ। तारिक़ रहमान के नेतृत्व में गठित कैबिनेट से आर्थिक पुनरुद्धार, प्रशासनिक दक्षता, संस्थागत स्थिरता और वैश्विक कूटनीतिक जुड़ाव जैसे मुद्दों पर स्पष्ट नीति-उन्मुख कदमों की अपेक्षा की जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि BNP के सामने प्रमुख चुनौतियाँ होंगी:
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आर्थिक प्रबंधन और निवेश आकर्षण
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नौकरशाही एवं प्रशासनिक सुधार
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कानून-व्यवस्था में विश्वसनीयता
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संवैधानिक सुधार प्रक्रिया में सहमति निर्माण
सरकार के शुरुआती कदम यह निर्धारित करेंगे कि नई व्यवस्था जन-अपेक्षाओं और स्थिरता के बीच किस प्रकार सामंजस्य स्थापित करती है।
वैश्विक कूटनीतिक उपस्थिति: क्षेत्रीय संतुलन के संकेत
शपथ ग्रहण समारोह में लगभग 1,200 स्थानीय एवं विदेशी अतिथियों की उपस्थिति ने इस राजनीतिक संक्रमण को अंतरराष्ट्रीय महत्व प्रदान किया। दक्षिण एशियाई और व्यापक इंडो-पैसिफ़िक परिप्रेक्ष्य में यह कार्यक्रम कूटनीतिक संवाद और क्षेत्रीय समीकरणों का द्योतक भी बना।
समारोह में जिन प्रमुख प्रतिनिधियों की भागीदारी उल्लेखनीय रही, उनमें शामिल हैं:
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भूटान के प्रधानमंत्री त्शेरिंग टोबगे
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भारत से लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला
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पाकिस्तान के योजना मंत्री अहसान इक़बाल
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नेपाल की अंतरिम सरकार के विदेश मंत्री बाला नंदा शर्मा
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श्रीलंका के स्वास्थ्य मंत्री नलिंदा जयतिस्सा
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क़तर, मलेशिया और ब्रुनेई के उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल
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यूनाइटेड किंगडम का प्रतिनिधित्व सीमा मल्होत्रा, इंडो-पैसिफ़िक अंडर सेक्रेटरी द्वारा
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मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्ज़ू की संभावित उपस्थिति
यह विविध उपस्थिति बांग्लादेश के साथ क्षेत्रीय साझेदारी, आर्थिक सहयोग और रणनीतिक संवाद की निरंतरता को रेखांकित करती है।
अंतरिम सरकार का समापन: प्रो. मोहम्मद युनुस का दृष्टिकोण
नई सरकार के शपथ ग्रहण के साथ ही मुख्य सलाहकार प्रो. मोहम्मद युनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार का कार्यकाल औपचारिक रूप से समाप्त हुआ। प्रो. युनुस ने अपने विदाई संबोधन में चुनाव को केवल सत्ता हस्तांतरण का माध्यम न मानते हुए इसे “नए बांग्लादेश की शुरुआत” बताया।
अपने भाषण में उन्होंने संस्थागत सुधार, प्रशासनिक जवाबदेही और नागरिक अधिकारों की रक्षा को अंतरिम सरकार की प्रमुख उपलब्धियों के रूप में प्रस्तुत किया। विशेष रूप से उन्होंने “जुलाई चार्टर” का उल्लेख करते हुए इसे लोकतांत्रिक और संस्थागत पुनर्निर्माण का आधारस्तंभ बताया।
हालिया घटनाक्रम में विपक्षी गठबंधनों के भीतर भी चार्टर के प्रति समर्थन का विस्तार देखा गया, जिससे यह संकेत मिलता है कि सुधार-प्रक्रिया को व्यापक राजनीतिक वैधता मिल सकती है।
संवैधानिक सुधार आयोग: संभावनाएँ, जोखिम और नीति आयाम
संसद का सीमित अवधि के लिए संविधान सुधार आयोग के रूप में कार्य करना एक संवैधानिक नवाचार है, जिसका प्रभाव दीर्घकालिक हो सकता है। यह व्यवस्था शासन-तंत्र की दक्षता, शक्तियों के पृथक्करण, चुनावी ढाँचे और न्यायिक-संसदीय संतुलन जैसे मुद्दों पर व्यापक पुनर्विचार का अवसर देती है।
हालाँकि, इस प्रक्रिया की सफलता निम्न कारकों पर निर्भर करेगी:
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राजनीतिक सहमति और बहुदलीय सहभागिता
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पारदर्शिता एवं सार्वजनिक संवाद
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समय-सीमा के भीतर ठोस परिणाम
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विधायी कार्यों में बाधा न उत्पन्न होना
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संवैधानिक स्थिरता और संस्थागत विश्वास
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह प्रयोग सुव्यवस्थित ढंग से संचालित हुआ, तो बांग्लादेश के लोकतांत्रिक ढाँचे को नई ऊर्जा और विश्वसनीयता मिल सकती है।
निष्कर्ष:-
परिवर्तन के 180 दिन
आज का दिन बांग्लादेश के लिए एक संक्रमणीय लेकिन संभावनापूर्ण अध्याय की शुरुआत है। नई सरकार, नव-निर्वाचित संसद और संविधान सुधार आयोग के बीच समन्वय आने वाले महीनों में देश की राजनीतिक दिशा तय करेगा। अगले 180 दिन न केवल संवैधानिक सुधारों की गति को परिभाषित करेंगे, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्थिरता और जनता के विश्वास की कसौटी भी बनेंगे।
