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Budget 2026 पर सियासी संग्राम: राहुल गांधी बोले ‘हकीकत से अंधा’, मोदी ने बताया ऐतिहासिक

नई दिल्ली | 2 फ़रवरी  2026 |✍🏻 Z S Razzaqi | वरिष्ठ पत्रकार      

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने डेरिवेटिव बाज़ार में लेनदेन को नियंत्रित करने के उद्देश्य से फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग पर लगने वाले सिक्योरिटीज़ ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में उल्लेखनीय बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा है। बजट प्रस्ताव के अनुसार, फ्यूचर्स सौदों पर STT की दर 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत कर दी गई है, जबकि ऑप्शंस ट्रांजैक्शंस पर यह कर 0.01 प्रतिशत से बढ़कर 0.15 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा। इस कदम को बाज़ार में अत्यधिक सट्टेबाज़ी पर अंकुश लगाने की दिशा में एक सख़्त लेकिन निर्णायक पहल के रूप में देखा जा रहा है।

इसके साथ ही केंद्र सरकार ने खनिज संसाधनों से समृद्ध राज्यों—ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु—के आर्थिक विकास को गति देने के लिए विशेष डेडिकेटेड कॉरिडोर विकसित करने का प्रस्ताव भी रखा है। इन कॉरिडोरों का उद्देश्य औद्योगिक कनेक्टिविटी, लॉजिस्टिक्स और निवेश को सशक्त बनाना है। वित्त मंत्री ने इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण मिशन के लिए आवंटन को भी बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपये करने की घोषणा की, जिससे घरेलू उत्पादन, रोज़गार सृजन और ‘मेक इन इंडिया’ पहल को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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केंद्रीय बजट 2026-27 के ये प्रमुख ऐलान ऐसे समय में सामने आए हैं जब आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 ने भारत की घरेलू आर्थिक संभावनाओं को लेकर अपेक्षाकृत सकारात्मक तस्वीर पेश की है। सर्वेक्षण के अनुसार, भारत की मध्यम अवधि की विकास दर का अनुमान 6.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दिया गया है। हालांकि, वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर आकलन कहीं अधिक चिंताजनक है। सर्वे में चेतावनी दी गई है कि वर्ष 2026 में 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट से भी गंभीर आर्थिक संकट की 10 से 20 प्रतिशत तक आशंका बनी हुई है। यहां तक कि सर्वश्रेष्ठ स्थिति में भी वैश्विक परिस्थितियों के 2025 जैसी ही रहने का अनुमान जताया गया है, लेकिन उन्हें पहले की तुलना में कहीं अधिक अस्थिर और नाज़ुक बताया गया है।

आयात पर निर्भरता खत्म करने की रणनीति

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के संयुक्त निदेशक बी.के. दास ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि संगठन के लिए वित्तीय संसाधन कभी भी बाधा नहीं बने हैं। उनके अनुसार, केंद्र सरकार ने हमेशा DRDO को बिना किसी शर्त के पूरा समर्थन दिया है और बजट की कमी को लेकर संगठन को कभी सीमित नहीं किया गया।

बी.के. दास ने बताया कि DRDO को ऐसी अत्याधुनिक और भविष्य उन्मुख तकनीकों पर काम करने का निर्देश दिया गया है, जो फिलहाल दुनिया के किसी भी देश के पास उपलब्ध नहीं हैं। उनका कहना था कि अब ज़रूरत इस बात की है कि हम उन रक्षा प्रणालियों और उपकरणों को विकसित करें, जिनकी कल्पना भारतीय सशस्त्र बल आने वाले समय के लिए कर रहे हैं।

उन्होंने बदलते वैश्विक भू-राजनीतिक हालात और युद्ध के स्वरूपों का उल्लेख करते हुए कहा कि मौजूदा दौर में आयात पर निर्भर रहना व्यवहारिक नहीं रह गया है। आज युद्ध की प्रकृति, रणनीति और तकनीक लगातार बदल रही है, ऐसे में भारत को अपनी रक्षा आवश्यकताओं के लिए आत्मनिर्भर बनना होगा और समय की प्रतीक्षा किए बिना स्वदेशी समाधान विकसित करने होंगे।

राहुल गांधी ने बजट 2026 को भारत की वास्तविक समस्याओं से अंधा करार दिया

कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने रविवार को केंद्रीय बजट 2026 पर कड़ी प्रतिक्रिया दी और नरेंद्र मोदी सरकार पर आरोप लगाया कि उसने देश की गहन आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों को नजरअंदाज किया है। गांधी ने कहा कि यह बजट बेरोजगारी, कृषि संकट, घटती घरेलू बचत और निवेशकों के विश्वास में गिरावट जैसी गंभीर समस्याओं का समाधान नहीं करता। उन्होंने बयान में कहा, “बेरोजगार युवा, घटती विनिर्माण दर, निवेशकों का बाहर जाना, घरेलू बचत में गिरावट, किसान संकट, और संभावित वैश्विक झटके — सभी अनदेखे। यह बजट सुधार से इंकार करता है और भारत की वास्तविक समस्याओं के प्रति अंधा है।”

कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी बजट की आलोचना करते हुए कहा कि यह सरकार की नई सोच और नीतिगत दृष्टि की कमी को दर्शाता है। खड़गे ने कहा कि बजट गरीबों के लिए कोई ठोस समाधान पेश नहीं करता, मुद्रास्फीति पर नियंत्रण के उपाय नहीं दिखाता, उपभोक्ता मांग को पुनर्जीवित करने की कोई योजना नहीं है और राज्यों के वित्तीय संकट का समाधान भी नहीं देता।

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वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बजट 2026 को “ऐतिहासिक” बताते हुए कहा कि यह महिलाओं को सशक्त बनाने और भारत के सुधार मार्ग को तेज करने वाला है। पीएम मोदी ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की तारीफ करते हुए कहा कि यह बजट आकांक्षाओं को वास्तविकता में बदलता है और भविष्य की विकास यात्रा के लिए ठोस आधार तैयार करता है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में बजट पेश करते हुए कर सुधारों, आयकर छूट और TCS दरों में बदलाव जैसी कई पहलें की घोषणा की, जिससे अनुपालन सरल और जीवन आसान बने। साथ ही, घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए कुछ औद्योगिक मशीनरी पर आयात शुल्क छूट को हटा दिया गया और तंबाकू उत्पादों पर नई एक्साइज ड्यूटी तथा सेस लागू किया गया। फ्यूचर्स और ऑप्शन्स ट्रेडिंग पर सुरक्षा लेन-देन कर (STT) बढ़ाने का भी निर्णय लिया गया।

केंद्रीय बजट 2026-27 विकास को गति देने वाला: CII

भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के दक्षिणी क्षेत्र के उपाध्यक्ष और डैनफॉस इंडिया के अध्यक्ष पी. रविचंद्रन ने केंद्रीय बजट 2026-27 को स्पष्ट रूप से विकासोन्मुख बताया है। रविवार (1 फरवरी 2026) को चेन्नई में CII-दक्षिणी क्षेत्र द्वारा आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि यदि इस बजट को एक शब्द में परिभाषित किया जाए, तो वह शब्द “विकास” होगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत बजट में आर्थिक गतिविधियों को तेज़ करने और दीर्घकालिक विकास को मजबूत आधार देने की स्पष्ट रणनीति दिखाई देती है। उन्होंने बताया कि बीते तीन–चार वर्षों से बुनियादी ढांचे पर सरकार का विशेष जोर रहा है और बजट में घोषित हाई-स्पीड रेलवे कॉरिडोर, फ्रेट कॉरिडोर और जलमार्ग जैसी परियोजनाएं देश की कनेक्टिविटी को मजबूत करने के साथ-साथ रोजगार सृजन और समग्र आर्थिक विकास को नई रफ्तार देंगी।

किफायती आवास को लेकर बजट से निराश रियल एस्टेट उद्योग: CREDAI

रियल एस्टेट क्षेत्र की शीर्ष संस्था कन्फेडरेशन ऑफ रियल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CREDAI) ने केंद्रीय बजट में किफायती आवास को लेकर ठोस प्रावधानों के अभाव पर गहरी नाराज़गी जताई है। संगठन का कहना है कि बजट में न तो मांग को प्रोत्साहित करने के लिए कोई प्रभावी प्रोत्साहन दिया गया है और न ही आपूर्ति बढ़ाने के लिए कोई स्पष्ट नीति सामने रखी गई है, जिससे यह क्षेत्र और दबाव में आ सकता है।

CREDAI के राष्ट्रीय अध्यक्ष शेखर पटेल ने बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि संगठन इस बात से “गंभीर रूप से निराश” है कि किफायती आवास के लिए कोई ठोस पहल नहीं की गई। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि किफायती आवास की मौजूदा, पुराने मानकों पर आधारित परिभाषा में समय रहते बदलाव नहीं किया गया, तो कुल आवासीय आपूर्ति में इस सेगमेंट की हिस्सेदारी 18 प्रतिशत से घटकर लगभग 12 प्रतिशत तक सिमट सकती है, जो आवासीय क्षेत्र और आम खरीदार—दोनों के लिए चिंता का विषय होगा।

क्रिटिकल मिनरल्स पर आयात शुल्क छूट को वेदांता ने बताया समयानुकूल कदम

वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने क्रिटिकल मिनरल्स के प्रसंस्करण में उपयोग होने वाले कैपिटल गुड्स पर आयात शुल्क में छूट देने के सरकार के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिदृश्य में यह कदम न केवल समयानुकूल है, बल्कि भारत की खनिज सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में भी अहम भूमिका निभाएगा।

अनिल अग्रवाल ने सरकार द्वारा क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ एलिमेंट्स पर दिए जा रहे विशेष ध्यान की सराहना करते हुए कहा कि ओडिशा, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और केरल में प्रस्तावित ‘रेयर अर्थ्स कॉरिडोर’—जो खनन, प्रसंस्करण, अनुसंधान एवं विकास तथा विनिर्माण को समर्पित होंगे—आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और रणनीतिक खनिज आत्मनिर्भरता को नई मजबूती प्रदान करेंगे।

रिटेल सेक्टर पर बजट का असर धीमा और असमान रहेगा: आरएआई

रिटेलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (RAI) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कुमार राजगोपालन ने कहा है कि केंद्रीय बजट 2026–27 को तात्कालिक रूप से उपभोग बढ़ाने के उद्देश्य से तैयार नहीं किया गया है। उनके अनुसार, यह बजट अल्पकालिक खपत को प्रोत्साहित करने के बजाय रिटेल सेक्टर के लिए एक मजबूत और स्थायी परिचालन वातावरण तैयार करने पर केंद्रित है, जिसमें वित्तीय अनुशासन, बुनियादी ढांचे में निवेश, एमएसएमई को सक्षम बनाना, कौशल विकास और क्षेत्रीय संतुलित विकास जैसी प्राथमिकताएं शामिल हैं।

उन्होंने आगे कहा कि रिटेल उद्योग पर बजट का प्रभाव धीरे-धीरे और असमान रूप से सामने आएगा। यह असर सीधे किसी नीति समर्थन से नहीं, बल्कि आपूर्ति श्रृंखलाओं में सुधार, कार्यबल की बेहतर तैयारी, तथा ग्रामीण और गैर-मेट्रो क्षेत्रों में बढ़ती मांग जैसे कारकों से प्रेरित होगा। उनके अनुसार, आने वाले समय में यही संरचनात्मक सुधार रिटेल सेक्टर की वास्तविक दिशा और गति तय करेंगे।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में ठोस क़दम उठाता बजट: अनिश शाह

महिंद्रा समूह के ग्रुप सीईओ और प्रबंध निदेशक अनिश शाह ने कहा है कि केंद्रीय बजट ने आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूती देने के लिए सार्थक और दूरदर्शी पहलें की हैं। उनके अनुसार, उन्नत और रणनीतिक विनिर्माण क्षेत्रों पर बढ़ता जोर—जिसमें ‘बायोफार्मा शक्ति’ जैसी विस्तारित योजनाओं और सेमीकंडक्टर मिशन (ISM 2.0) की शुरुआत शामिल है—यह स्पष्ट संकेत देता है कि सरकार वैश्विक स्तर की उत्पादन क्षमताएं विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि घरेलू वैल्यू चेन को सशक्त करना और महत्वपूर्ण आयात निर्भरता को चरणबद्ध रूप से कम करना भारत के भविष्य के औद्योगिक नेतृत्व की बुनियाद होगा। अनिश शाह के मुताबिक, ये कदम न केवल देश के औद्योगिक ढांचे को मजबूती देंगे, बल्कि भारत को वैश्विक विनिर्माण मानचित्र पर एक निर्णायक शक्ति के रूप में स्थापित करने में भी सहायक साबित होंगे।

बुनियादी ढांचे और आर्थिक स्थिरता से लग्ज़री कार बाज़ार को मिलेगा समर्थन: मर्सिडीज़-बेंज इंडिया

मर्सिडीज़-बेंज इंडिया के प्रबंध निदेशक और सीईओ ने कहा है कि भारत में बेहतर हाईवे नेटवर्क और शहरों के बीच मजबूत होती कनेक्टिविटी का सीधा असर लग्ज़री कारों की मांग पर पड़ता रहा है। उनके अनुसार, इतिहास गवाह है कि जब सड़क अवसंरचना में सुधार होता है, तो प्रीमियम और लग्ज़री ऑटोमोबाइल सेगमेंट में मांग स्वाभाविक रूप से बढ़ती है।

उन्होंने केंद्रीय बजट की व्यापक आर्थिक दिशा पर टिप्पणी करते हुए कहा कि 4.3 प्रतिशत के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य के माध्यम से दिखाई गई वित्तीय अनुशासन की प्रतिबद्धता और निर्यात पर मजबूत फोकस, आर्थिक स्थिरता का स्पष्ट संकेत देती है। इससे मुद्रा में उतार-चढ़ाव कम होने की संभावना बनती है, जो ऑटोमोबाइल जैसे आयात-निर्भर क्षेत्रों के लिए सकारात्मक है।

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि बजट में कारोबार सुगमता को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया है। सीमा शुल्क भुगतान को 30 दिनों तक टालने की व्यवस्था से कंपनियों के नकदी प्रवाह में उल्लेखनीय सुधार आ सकता है। उनके अनुसार, यह बजट तात्कालिक लाभों के बजाय दीर्घकालिक और संरचनात्मक फायदों पर अधिक केंद्रित है, जो उद्योग के लिए स्थायी विकास का आधार तैयार करेगा।

केंद्रीय बजट वास्तव में ‘आम आदमी का बजट’ साबित होता है: पीबी फिनटेक

पीबी फिनटेक के संयुक्त समूह सीईओ सरबवीर सिंह ने केंद्रीय बजट को आम करदाताओं के हितों को प्राथमिकता देने वाला बताया है। उन्होंने कहा कि नई आयकर कानून के ज़रिये कर ढांचे को सरल बनाने पर दिया गया जोर, वेतनभोगी वर्ग और छोटे करदाताओं के लिए अनुपालन प्रक्रिया को आसान बनाने और अनावश्यक जटिलताओं को कम करने की स्पष्ट दिशा दिखाता है।

उन्होंने आगे कहा कि वित्त वर्ष 2026–27 के लिए सार्वजनिक पूंजीगत व्यय को बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये करने का फैसला, साथ ही राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद के लगभग 4.3 प्रतिशत के आसपास सीमित रखने की रणनीति, विकास और वित्तीय अनुशासन के बीच संतुलन का परिचायक है। उनके अनुसार, यही संतुलित दृष्टिकोण भारत के ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए अत्यंत आवश्यक है।

बजट प्रचार से कोसों दूर, नीरस और अस्पष्ट: जयराम रमेश

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने केंद्रीय बजट पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे प्रचार के शोर के मुकाबले बेहद कमजोर और प्रभावहीन बताया। उन्होंने कहा कि जिस बड़े उत्साह और उम्मीदों के साथ बजट को पेश किया गया, वह ज़मीनी हकीकत में कहीं नज़र नहीं आता। उनके अनुसार, बजट न तो नई दिशा देता है और न ही कोई ठोस समाधान प्रस्तुत करता है, जिससे यह पूरी तरह नीरस प्रतीत होता है।

जयराम रमेश ने वित्त मंत्री के बजट भाषण को भी पारदर्शिता के अभाव वाला करार दिया। उनका कहना था कि भाषण में प्रमुख योजनाओं और फ्लैगशिप कार्यक्रमों के लिए किए गए वास्तविक बजटीय आवंटनों की स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई, जिससे सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े होते हैं। इसके साथ ही उन्होंने बजट के समय निर्धारण पर भी आपत्ति जताई और कहा कि अद्यतन जीडीपी और सीपीआई आंकड़ों के सामने आने से पहले बजट पेश किया जाना नीति समन्वय की कमी को दर्शाता है, जो आर्थिक प्रबंधन के लिहाज से चिंताजनक है।

बजट 2026 में 14 राज्यों का विशेष उल्लेख, परियोजनाओं से 24 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को सीधा लाभ

केंद्रीय बजट 2026 पर अपने भाषण में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट रूप से 14 राज्यों का नाम लेकर उनके लिए प्रस्तावित पहलों और योजनाओं का उल्लेख किया। इन राज्यों को बजट की प्राथमिकताओं में विशेष स्थान दिए जाने को क्षेत्रीय विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

हालांकि, यदि बजट में घोषित बुनियादी ढांचा, रेलवे और विरासत संरक्षण से जुड़ी 27 विशिष्ट परियोजनाओं और स्थानों को शामिल किया जाए, तो इन पहलों का सीधा प्रभाव 24 अलग-अलग राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों तक पहुंचता है। यह तथ्य दर्शाता है कि बजट का रोडमैप केवल कुछ चुनिंदा क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के व्यापक भौगोलिक विस्तार को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

बजट 2026 में 14 राज्यों का प्रत्यक्ष उल्लेख, 24 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों तक फैला विकास रोडमैप

केंद्रीय बजट 2026 पर अपने संबोधन में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट रूप से 14 राज्यों का नाम लेते हुए उनके लिए प्रस्तावित योजनाओं और पहलों का उल्लेख किया। यह संकेत करता है कि बजट की प्राथमिकताओं में इन राज्यों को विशेष महत्व दिया गया है।

हालांकि, यदि बजट में शामिल बुनियादी ढांचा, रेलवे और विरासत संरक्षण से जुड़ी 27 विशिष्ट शहरों और परियोजना स्थलों को समग्र रूप से देखा जाए, तो इन पहलों का सीधा जुड़ाव कुल 24 अलग-अलग राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से बनता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि बजट 2026 का विकास रोडमैप व्यापक क्षेत्रीय संतुलन और देशव्यापी भागीदारी को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

बजट 2026 में भारत के विकास पथ पर भरोसे का संदेश: संजीव बजाज

बजाज फाइनेंस के संयुक्त अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक संजीव बजाज ने कहा कि बजट 2026 वैश्विक अस्थिरता के बीच भी भारत की विकास यात्रा में विश्वास जगाता है। उन्होंने बताया कि सरकार का संतुलित दृष्टिकोण—मजबूत पूंजीगत व्यय को विश्वसनीय वित्तीय अनुशासन के साथ जोड़ना—बाज़ारों, वित्तीय संस्थानों और दीर्घकालिक निवेशकों के लिए भरोसे का संकेत देता है।

संजिव बजाज ने यह भी कहा कि कॉर्पोरेट बॉन्ड मार्केट को सशक्त बनाने, बड़े इश्यू को प्रोत्साहित करने और मार्केट-मेकिंग तंत्र को सुधारने के उपाय लंबे समय तक पूंजी को बुनियादी ढांचे, विनिर्माण और नवाचार की दिशा में आकर्षित करेंगे। उनके अनुसार, एक स्थिर और पूर्वानुमेय कर और नियामक वातावरण दीर्घकालिक निवेशकों के लिए अनिवार्य है, और यह बजट स्पष्ट रूप से उसी दिशा में निर्णायक कदम उठा रहा है।

बजट 2026 ने वैश्विक भारतीयों के लिए आसान अनुपालन और बेहतर नकदी प्रवाह सुनिश्चित किया: क्लियरटैक्स

क्लियरटैक्स के संस्थापक और सीईओ, आर्चित गुप्तो ने कहा कि केंद्रीय बजट 2026 ने वैश्विक भारतीय परिवारों के वित्तीय व्यवहार और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए व्यावहारिक कदम उठाए हैं। उन्होंने बताया कि अब निवासी खरीदारों को रियल एस्टेट लेन-देन में TDS काटने के लिए TAN की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे महत्वपूर्ण प्रक्रियात्मक बाधाएं दूर होंगी और सेकेंडरी मार्केट में बिक्री तेज़ हो सकेगी।

इसके साथ ही, उन्होंने कहा कि विदेश में शिक्षा, चिकित्सा उपचार और यात्रा पर TCS की दर को 5% से घटाकर 2% करना सीधे तौर पर परिवारों के नकदी प्रवाह को आसान बनाएगा। यह कदम विशेष रूप से उन माता-पिता के लिए फायदेमंद है जो अपने बच्चों को विदेश भेज रहे हैं या यात्रा की योजना बना रहे हैं, क्योंकि अब अग्रिम धनराशि बैंक में लंबे समय तक लॉक नहीं होगी। आर्चित गुप्तो के अनुसार, यह बजट वैश्विक भारतीय परिवारों के खर्च करने के वास्तविक पैटर्न को समझते हुए उनकी सुविधा और वित्तीय लचीलापन बढ़ाने की दिशा में निर्णायक कदम है।

मांग बढ़ाने के लिए सिस्टम में निवेश जारी रखना जरूरी: पूर्व FICCI अध्यक्ष नैना लाल किडवई

पूर्व FICCI अध्यक्ष नैना लाल किडवई ने कहा है कि भारत की अर्थव्यवस्था में स्थिर विकास के लिए वित्तीय नीतियों को सतत समर्थन देना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि पिछले दशक में सरकार द्वारा बुनियादी ढांचे में किए गए बड़े निवेश और हाल की GST सुधारों से उपभोग को बढ़ावा मिला है, लेकिन इसे जारी रखने के लिए सिस्टम में लगातार धन प्रवाह बनाए रखना होगा ताकि घरेलू मांग में वृद्धि हो।

नैना लाल किडवई ने आगे कहा कि जब तक मांग पर्याप्त रूप से नहीं बढ़ती, निजी क्षेत्र से अपेक्षित पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) संभव नहीं होगा। वर्तमान में उद्योग की क्षमता उपयोग दर लगभग 75% पर स्थिर है, जो दर्शाता है कि अर्थव्यवस्था में मांग बढ़ाने के लिए और निवेश की आवश्यकता है। उनके अनुसार, यह कदम दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता और विकास के लिए अहम है।

बजट 2026 में प्रमुख योजनाओं के लिए आवंटन की घोषणा

केंद्रीय बजट 2026–27 में कई प्रमुख योजनाओं के लिए विशेष आवंटन किए गए हैं, जो देश के विकास और सामाजिक कल्याण के लक्ष्य को आगे बढ़ाएंगे। इनमें प्रमुख आवंटन इस प्रकार हैं:

  • प्रधान मंत्री स्किलिंग और रोजगार सुधार योजना (PM SETU): ₹6,141 करोड़

  • सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 (Saksham Anganwadi & POSHAN 2.0): ₹23,100 करोड़

  • प्रधान मंत्री किसान सम्मान निधि (PM Kisan): ₹63,500 करोड़

  • स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0: ₹900 करोड़

  • नेशनल को-ऑपरेटिव एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (NCEL) को अनुदान: ₹450 करोड़

  • प्रधान मंत्री वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन (PMONOS): ₹2,200 करोड़

  • प्रदूषण नियंत्रण (Control of Pollution): ₹1,091 करोड़

  • वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम फेज-2: ₹300 करोड़

  • मेट्रो परियोजनाएं (Metro Projects): ₹28,740 करोड़

यह आवंटन सामाजिक कल्याण, ग्रामीण विकास, पर्यावरण संरक्षण और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में सरकार की प्राथमिकताओं को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।

कस्टम ड्यूटी संरचना में सुधार और कैंसर रोगियों को राहत

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026–27 में व्यक्तिगत उपयोग के लिए आयात की जाने वाली वस्तुओं पर कस्टम ड्यूटी को सरल बनाने का प्रस्ताव रखा है। उन्होंने सभी ड्यूटेबल वस्तुओं पर आयात शुल्क दर को 20% से घटाकर 10% करने की योजना प्रस्तुत की है, ताकि आम नागरिकों के लिए व्यक्तिगत आयात आसान और किफायती बने।

साथ ही, रोगियों को विशेष राहत प्रदान करने के लिए, विशेष रूप से कैंसर से पीड़ित मरीजों के लिए 17 दवाओं या औषधियों पर मूल कस्टम ड्यूटी को छूट देने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके अलावा, सात और दुर्लभ बीमारियों को भी सूची में शामिल करने का प्रस्ताव है, ताकि इन बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं, औषधियों और विशेष चिकित्सीय खाद्य पदार्थों (FSMP) पर व्यक्तिगत आयात में कस्टम ड्यूटी छूट मिल सके।

FY27 बजट: ध्यान देने योग्य प्रमुख आर्थिक आंकड़े

केंद्रीय बजट 2026–27 में कुछ प्रमुख आर्थिक आंकड़े विशेष रूप से नजर रखे जाने लायक हैं:

राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit): वर्तमान वित्तीय वर्ष (अप्रैल 2025–मार्च 2026 या FY26) के लिए अनुमानित राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.4% है। यह सरकार के व्यय और आय के बीच का अंतर दर्शाता है।

पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure): इस वित्तीय वर्ष के लिए सरकार का निर्धारित पूंजीगत व्यय ₹11.2 लाख करोड़ है। आगामी बजट में भी सरकार का ध्यान पूंजीगत व्यय पर केंद्रित रहने की संभावना है।
ऋण रोडमैप (Debt Roadmap): वित्त मंत्री ने 2024–25 के बजट भाषण में कहा था कि 2026–27 से वित्तीय नीति इस तरह से बनाई जाएगी कि केंद्रीय सरकारी ऋण जीडीपी के अनुपात में घटते हुए मार्ग पर हो।
कर राजस्व (Tax Revenue): FY25 की तुलना में 11% की वृद्धि के साथ 2025–26 के बजट में सकल कर राजस्व ₹42.70 लाख करोड़ निर्धारित किया गया था।
नाममात्र GDP (Nominal GDP): FY26 में भारत की नाममात्र GDP वृद्धि (वास्तविक GDP + मुद्रास्फीति) 10.1% अनुमानित है, जबकि वास्तविक GDP वृद्धि, जैसा कि NSO द्वारा अनुमानित, 7.4% है।

ये आंकड़े भारत की आर्थिक स्वास्थ्य, विकास दर और बजट प्राथमिकताओं की दिशा को समझने में महत्वपूर्ण संकेत देते हैं।

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