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वेट लॉस के नाम पर ज़हर: यूट्यूब वीडियो देखकर बोरेक्स खाने से कॉलेज छात्रा की दर्दनाक मौत

 25 जनवरी 2026 |✍🏻 Z S Razzaqi | वरिष्ठ पत्रकार     

बोरेक्स खाने से मदुरै की कॉलेज छात्रा की दर्दनाक मौत, स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सख़्त चेतावनी

तमिलनाडु के मदुरै से सामने आई एक बेहद चिंताजनक और दिल दहला देने वाली घटना ने सोशल मीडिया पर फैल रही मेडिकल भ्रामक जानकारियों की भयावह सच्चाई को उजागर कर दिया है। केवल यूट्यूब पर देखे गए एक वीडियो के भरोसे वज़न घटाने की दवा समझकर बोरेक्स का सेवन करने से एक कॉलेज छात्रा की मौत हो गई।

यह मामला न सिर्फ़ डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की गैर-ज़िम्मेदार सामग्री पर सवाल खड़े करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि ‘नेचुरल’ या ‘घरेलू इलाज’ के नाम पर परोसे जा रहे नुस्खे कितने घातक साबित हो सकते हैं।

Symbolic Image 

क्या है पूरा मामला?

मदुरै के सेल्लूर ज़िले के मीनांबलपुरम इलाके की रहने वाली कलैयारसी, एक निजी कॉलेज में ग्रेजुएशन के प्रथम वर्ष की छात्रा थीं। पुलिस के अनुसार, उनका वज़न थोड़ा अधिक था और वे इसे कम करने को लेकर चिंतित रहती थीं।

इसी दौरान उन्होंने एक यूट्यूब चैनल पर ऐसा वीडियो देखा, जिसमें दावा किया गया था कि बोरेक्स का सेवन करने से तेज़ी से वज़न कम किया जा सकता है। बिना किसी चिकित्सकीय सलाह के, कलैयारसी ने स्थानीय दवा की दुकान से बोरेक्स ख़रीदा और उसका सेवन कर लिया।

सेवन के कुछ ही समय बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। तेज़ उल्टियाँ हुईं और वे बेहोश हो गईं। परिजन उन्हें तत्काल एक निजी अस्पताल लेकर गए, जहाँ प्राथमिक इलाज के बाद उन्हें घर भेज दिया गया।

लेकिन रात में उनकी हालत फिर से गंभीर हो गई। परिजन उन्हें मदुरै के सरकारी राजाजी अस्पताल ले जा रहे थे, मगर दुर्भाग्यवश रास्ते में ही उनकी मौत हो गई।


पिता की चेतावनी, जो अनसुनी रह गई

कलैयारसी के पिता वेलमुरुगन ने मीडिया को बताया कि उन्होंने अपनी बेटी को पहले ही यूट्यूब पर बताए गए ऐसे नुस्खों से दूर रहने की सलाह दी थी। उन्होंने स्थानीय दवाइयाँ ख़रीदने और बिना डॉक्टर की सलाह के सेवन करने से भी मना किया था।

लेकिन सोशल मीडिया पर दिखाई गई ‘आसान और त्वरित’ वज़न घटाने की गारंटी ने एक होनहार छात्रा की जान ले ली।


पुलिस जांच और कानूनी कार्रवाई

इस पूरे मामले में सेल्लूर पुलिस स्टेशन में केस दर्ज कर लिया गया है और जांच जारी है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि संबंधित यूट्यूब चैनल ने किस आधार पर ऐसा दावा किया और क्या उस पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।


आखिर बोरेक्स है क्या?

विशेषज्ञों के अनुसार, बोरेक्स (सोडियम बोरेट) कोई दवा या खाद्य पदार्थ नहीं है, बल्कि एक औद्योगिक रसायन है।

कोयंबटूर स्थित भरतियार विश्वविद्यालय के केमिस्ट्री प्रोफ़ेसर सेल्वराज बताते हैं कि यह वही सफ़ेद पाउडर है, जिसका इस्तेमाल आमतौर पर कैरम बोर्ड पर किया जाता है ताकि गोटियाँ आसानी से फिसलें।

उनके शब्दों में,

“बोरेक्स एक बारीक नमक जैसा दिखने वाला रसायन है, लेकिन इसे खाने की चीज़ समझना बेहद ख़तरनाक है। इसकी विषाक्तता कीटनाशक के समान होती है।”

वे चेतावनी देते हैं कि जिस तरह ज़िंक या अन्य रसायन दवाइयों में बेहद सीमित मात्रा में मिलाए जाते हैं, उसी तरह बोरेक्स भी केवल शुद्धिकरण के बाद, बहुत कम मात्रा में और विशेष प्रयोजनों के लिए इस्तेमाल होता है—सीधे खाने के लिए बिल्कुल नहीं।


सिद्ध चिकित्सा भी नहीं देती ऐसी सलाह

सिद्ध चिकित्सा से जुड़े डॉक्टरों ने भी साफ़ शब्दों में कहा है कि सिद्ध पद्धति में बोरेक्स को वज़न घटाने की दवा के रूप में कभी इस्तेमाल नहीं किया जाता

सिद्ध चिकित्सक के. सिवारामन बताते हैं कि बोरेक्स का उपयोग कुछ दवाओं के निर्माण या बाहरी उपचार में सीमित मात्रा में होता है, जैसे मुंह के छाले या दंत संक्रमण।

उनका कहना है,

“गोलियाँ खाकर वज़न घटाने का कोई सुरक्षित तरीका नहीं है। संतुलित आहार और नियमित व्यायाम ही एकमात्र समाधान है।”

एक अन्य सिद्ध चिकित्सक वीरबाबू ने चेताया कि बिना शुद्धिकरण और उचित मात्रा के बोरेक्स का सेवन सीधे ज़हर खाने जैसा है।


शरीर पर क्या असर डालता है बोरेक्स?

गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट और लेप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. वी.जी. मोहन प्रसाद के अनुसार,

“बहुत अधिक मात्रा में बोरेक्स शरीर में जाने पर यह तेज़ी से आंतरिक अंगों को नुकसान पहुँचाता है।”

इसके दुष्प्रभावों में शामिल हैं—

  • गंभीर उल्टी और दस्त

  • तेज़ पेट दर्द

  • दौरे पड़ना

  • गुर्दों का फेल होना

  • आंतरिक रक्तस्राव

डॉ. मोहन प्रसाद कहते हैं कि यदि कोई व्यक्ति गलती से बोरेक्स खा ले, तो एक घंटे के भीतर अस्पताल पहुँचाना बेहद ज़रूरी है। देरी होने पर जान बचाना मुश्किल हो जाता है।


यूट्यूब ‘डॉक्टरों’ पर उठते सवाल

इस घटना के बाद एलोपैथिक और सिद्ध—दोनों तरह के चिकित्सकों ने सरकार से मांग की है कि ऐसे यूट्यूब चैनलों पर सख़्त कार्रवाई की जाए, जो बिना किसी मेडिकल योग्यता के ख़तरनाक सलाहें देते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में ख़ुद इलाज करने की प्रवृत्ति तेज़ी से बढ़ी है, जिसका बड़ा कारण सोशल मीडिया पर फैली अधूरी और भ्रामक जानकारी है।


एक मौत, कई चेतावनियाँ

मदुरै की इस छात्रा की मौत सिर्फ़ एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज के लिए चेतावनी है—
कि इंटरनेट पर दिखने वाली हर ‘नेचुरल’ या ‘आसान’ सलाह सुरक्षित नहीं होती।

डॉक्टरों का स्पष्ट संदेश है:
वज़न घटाने या किसी भी बीमारी के इलाज के लिए सोशल मीडिया नहीं, बल्कि योग्य चिकित्सक पर भरोसा करें।

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