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एपस्टीन सेक्स ट्रैफिकिंग जांच: अमेरिकी न्याय विभाग पर फाइलें सार्वजनिक करने की समय-सीमा का दबाव

20 दिसम्बर 2025 |✍🏻 Z S Razzaqi | अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक एवं वरिष्ठ पत्रकार    

वॉशिंगटन: अमेरिका के न्याय विभाग (DoJ) के सामने शुक्रवार की एक अहम समय-सीमा है, जिसके तहत उसे कुख्यात सेक्स अपराधी और अरबपति फाइनेंसर जेफ्री एपस्टीन से जुड़ी जांच फाइलों को सार्वजनिक करना होगा। यह मामला न केवल यौन शोषण की भयावह परतों को उजागर करता है, बल्कि सत्ता, राजनीति और प्रभावशाली लोगों के कथित गठजोड़ पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

जेफ्री एपस्टीन, जिसे नाबालिग लड़कियों और युवतियों के यौन शोषण तथा सेक्स ट्रैफिकिंग का दोषी ठहराया गया था, दुनिया के कई ताकतवर और रसूखदार लोगों से उसके संबंधों के कारण वर्षों से विवादों के केंद्र में रहा है। इनमें अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन, और ब्रिटेन के प्रिंस एंड्रयू जैसे नाम शामिल रहे हैं।


20 वर्षों की जांच का सबसे विस्तृत दस्तावेज़?

इन फाइलों के सार्वजनिक होने से पिछले लगभग दो दशकों में हुई सरकारी जांचों की सबसे विस्तृत तस्वीर सामने आने की उम्मीद है। खास तौर पर यह जानने की उत्सुकता है कि क्या एपस्टीन के प्रभावशाली सहयोगियों को उसके अपराधों की जानकारी थी, या वे किसी रूप में इसमें शामिल थे।

एपस्टीन की पीड़िताओं और मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि वर्ष 2008 में संघीय जांच को अचानक बंद किया जाना आज भी एक बड़ा रहस्य है। यही कारण है कि फाइलों की रिलीज़ को “देरी से मिला न्याय” कहा जा रहा है।


ट्रंप सरकार और कानून का दबाव

राजनीतिक दबाव के बीच, 19 नवंबर को डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसे कानून पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत न्याय विभाग को 30 दिनों के भीतर एपस्टीन से जुड़ी अधिकतर फाइलें और आंतरिक संचार सार्वजनिक करना अनिवार्य हो गया। इसमें एपस्टीन की फेडरल जेल में हुई मौत की जांच से जुड़े दस्तावेज़ भी शामिल हैं।

हालाँकि न्याय विभाग ने अब तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि दिन के किस समय ये फाइलें सार्वजनिक की जाएँगी।


“शर्मिंदगी या राजनीतिक संवेदनशीलता” के नाम पर रोक नहीं

यह कानून इस मायने में ऐतिहासिक है कि इसमें साफ कहा गया है कि:

  • पीड़ितों की पहचान और जारी जांच से जुड़े हिस्सों को छोड़कर

  • किसी भी दस्तावेज़ को शर्मिंदगी, छवि खराब होने या राजनीतिक असहजता के आधार पर रोका नहीं जा सकता

इस विधेयक का पारित होना अमेरिकी राजनीति में द्विदलीय सहयोग (bipartisanship) का दुर्लभ उदाहरण माना जा रहा है, जिसने महीनों के विरोध के बावजूद रास्ता बनाया।


अटॉर्नी जनरल की भूमिका और नए विवाद

अमेरिकी अटॉर्नी जनरल पैम बॉन्डी ने 14 नवंबर को घोषणा की थी कि उन्होंने एक वरिष्ठ संघीय अभियोजक को यह जांच करने का निर्देश दिया है कि क्या एपस्टीन के संबंध ट्रंप के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों से थे, जिनमें बिल क्लिंटन भी शामिल हैं।
हालाँकि जिन लोगों के नाम लिए गए, उन पर एपस्टीन की किसी भी पीड़िता ने यौन शोषण का आरोप नहीं लगाया है।


2005 से शुरू हुआ था पूरा मामला

एपस्टीन के खिलाफ जांच की शुरुआत 2005 में फ्लोरिडा के पाम बीच में हुई, जब एक 14 वर्षीय लड़की के परिवार ने आरोप लगाया कि उसका एपस्टीन के आलीशान घर में यौन शोषण किया गया।
FBI की जांच में कई नाबालिग लड़कियों के बयान सामने आए, जिन्होंने “सेक्स मसाज” के नाम पर शोषण की बात कही।

इसके बावजूद, एपस्टीन को एक अत्यंत विवादास्पद प्ली डील दी गई, जिससे वह संघीय मुकदमे से बच निकला और केवल राज्य स्तर के अपराधों में 18 महीने की सजा हुई।


वर्जीनिया जिउफ्रे और वैश्विक हलचल

एपस्टीन की सबसे चर्चित पीड़िता वर्जीनिया जिउफ्रे ने आरोप लगाया था कि एपस्टीन ने 17 वर्ष की उम्र से ही उसे कई प्रभावशाली पुरुषों के साथ यौन संबंधों के लिए मजबूर किया।
हालाँकि इन आरोपों में कभी आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं हुआ, लेकिन इससे वैश्विक स्तर पर साजिश सिद्धांतों और सत्ता संरक्षण की बहस तेज हुई।

अप्रैल में, 41 वर्ष की उम्र में वर्जीनिया जिउफ्रे की ऑस्ट्रेलिया में आत्महत्या हो गई, जिसने इस मामले को और अधिक भावनात्मक और संवेदनशील बना दिया।


जेल में मौत और गिसलेन मैक्सवेल

2019 में न्यूयॉर्क में दोबारा गिरफ्तारी के बाद, एपस्टीन की फेडरल जेल में रहस्यमयी मौत हो गई, जिसे आधिकारिक रूप से आत्महत्या बताया गया।
इसके बाद उसकी करीबी सहयोगी गिसलेन मैक्सवेल को दोषी ठहराया गया और उसे 20 साल की सजा सुनाई गई। हाल ही में उसे टेक्सास की न्यूनतम सुरक्षा वाली जेल में स्थानांतरित किया गया है।


पहले से उपलब्ध रिकॉर्ड, फिर भी बढ़ती मांग

हालाँकि एपस्टीन से जुड़े कई दस्तावेज़ पहले ही सार्वजनिक हैं—जैसे फ्लाइट लॉग्स, ईमेल्स, गवाही और अदालत रिकॉर्ड—लेकिन जनता की जिज्ञासा अब भी शांत नहीं हुई है, खासकर उन नामों को लेकर जो सत्ता और शोहरत के शीर्ष पर रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि किसी फाइल में नाम होना, अपराध का प्रमाण नहीं होता, लेकिन पारदर्शिता लोकतंत्र की बुनियाद है।


निष्कर्ष:-

जेफ्री एपस्टीन मामला अब केवल एक आपराधिक जांच नहीं रहा, बल्कि यह न्याय, नैतिकता और सत्ता की जवाबदेही की वैश्विक बहस बन चुका है।
न्याय विभाग द्वारा फाइलों की रिहाई यह तय करेगी कि क्या अमेरिका अपने सबसे संवेदनशील और असहज सवालों का सामना करने के लिए तैयार है या नहीं।

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