अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव के बीच कूटनीतिक मोर्चे पर एक महत्वपूर्ण बदलाव सामने आया है। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाक़र ग़ालिबाफ़ ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच हुई बातचीत के बाद वाशिंगटन, तेहरान के लगभग 12 अरब डॉलर के जमे हुए फंड को जारी करने पर सहमत हो गया है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब दोनों देशों के बीच वर्षों से चले आ रहे राजनीतिक टकराव, परमाणु विवाद, प्रतिबंधों और क्षेत्रीय संघर्षों को कम करने के लिए बातचीत तेज हुई है। अमेरिका की ओर से ईरान के तेल और पेट्रोकेमिकल निर्यात पर लगे कुछ प्रतिबंधों में भी अस्थायी राहत दी गई है, जिससे ईरान को अपनी आर्थिक गतिविधियों को दोबारा गति देने का अवसर मिल सकता है।
स्विट्जरलैंड में हुई बातचीत के बाद बड़ा ऐलान
ईरानी प्रतिनिधिमंडल और अमेरिकी अधिकारियों के बीच स्विट्जरलैंड में हुई तकनीकी वार्ता के बाद ग़ालिबाफ़ ने कहा कि बातचीत में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रगति हुई है।
उन्होंने कहा कि यह बैठक केवल आर्थिक मामलों तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसमें लेबनान में संघर्ष को रोकने, स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज़ की सुरक्षा व्यवस्था, तेल बिक्री में राहत और आर्थिक प्रतिबंधों में ढील जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
ग़ालिबाफ़ के अनुसार, अमेरिका द्वारा रोके गए ईरानी फंड को दो चरणों में जारी किया जाएगा। प्रत्येक चरण में लगभग 6 अरब डॉलर की राशि शामिल होगी।
उन्होंने कहा कि यह समझौता अभी अंतिम शांति समझौता नहीं है, बल्कि आगे की बातचीत के लिए एक महत्वपूर्ण शुरुआत है।
ईरान को तेल बिक्री और बैंकिंग गतिविधियों में राहत
ईरानी अधिकारियों के अनुसार, अमेरिका ने ईरान के तेल क्षेत्र से जुड़े कुछ प्रतिबंधों में अस्थायी छूट देने पर सहमति जताई है। यह राहत 21 अगस्त तक प्रभावी रहने की बात कही गई है।
ईरान लंबे समय से अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण तेल निर्यात और अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग प्रणाली में कठिनाइयों का सामना करता रहा है।
ग़ालिबाफ़ ने कहा कि:
“अभी अंतिम समझौता नहीं हुआ है, इसलिए हमें आगे भी प्रयास जारी रखने होंगे। लेकिन तेल बिक्री और बैंकिंग गतिविधियों के लिए जरूरी राहत प्राप्त हुई है।”
यह कदम ईरान की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि तेल निर्यात देश की आय का एक प्रमुख स्रोत है।
ईरान: अमेरिका से कृषि उत्पाद खरीदने की कोई बाध्यता नहीं
अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से यह संकेत दिया गया था कि जारी किए गए फंड का इस्तेमाल अमेरिकी सामान खरीदने में किया जा सकता है।
इस पर ईरान के केंद्रीय बैंक के गवर्नर अब्दोलनासेर हेममती ने कहा कि ईरान पर अमेरिका से सामान खरीदने की कोई बाध्यता नहीं है।
उन्होंने कहा कि शुरुआती 6 अरब डॉलर का इस्तेमाल आवश्यक वस्तुओं और दवाओं की खरीद के लिए किया जा सकता है। हालांकि, यदि किसी अमेरिकी उत्पाद की कीमत और गुणवत्ता बेहतर होगी तो ईरान उसे खरीदने पर विचार कर सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि बाकी राशि का उपयोग अन्य गैर-प्रतिबंधित वस्तुओं और आर्थिक जरूरतों के लिए किया जा सकता है।
लेबनान संकट और संघर्ष रोकने की कोशिश
अमेरिका-ईरान वार्ता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा लेबनान में जारी तनाव भी रहा।
ग़ालिबाफ़ ने बताया कि लेबनान में एक समन्वय केंद्र स्थापित करने पर सहमति बनी है, जिसका उद्देश्य विवादों को बढ़ने से रोकना और युद्ध की स्थिति वापस आने से बचाना होगा।
उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था लोगों को सामान्य जीवन की ओर लौटने में मदद कर सकती है।
हालांकि, दक्षिणी लेबनान में रहने वाले कई लोग अभी भी युद्धविराम को लेकर आशंकित हैं। विस्थापित लोगों का कहना है कि पहले भी कई बार संघर्ष विराम हुए लेकिन बाद में हमले फिर शुरू हो गए।
स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज़ पर नई व्यवस्था
ग़ालिबाफ़ ने स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज़ को लेकर भी नई व्यवस्था की जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि समुद्री मार्ग की सुरक्षा और संभावित विवादों को रोकने के लिए हॉटलाइन और संपर्क केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज़ दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। यहां किसी भी तरह का तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकता है।
आगे की बातचीत में परमाणु मुद्दा और आर्थिक विकास शामिल
ईरानी उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने बताया कि तकनीकी स्तर की बातचीत पूरी हो चुकी है और अब अगला चरण उच्च स्तरीय समिति की निगरानी में होगा।
इस प्रक्रिया के लिए चार कार्य समूह बनाए गए हैं:
प्रतिबंध हटाने से जुड़े मुद्दे
परमाणु कार्यक्रम से जुड़े विषय
पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास
समझौते के पालन और निगरानी की व्यवस्था
अमेरिका और ईरान के बीच यह बातचीत केवल दो देशों के संबंधों को ही नहीं बल्कि पूरे मध्य पूर्व की राजनीतिक स्थिति को प्रभावित कर सकती है।
गाज़ा और क्षेत्रीय संकट अब भी बड़ी चुनौती
जहां अमेरिका-ईरान बातचीत से उम्मीदें बढ़ी हैं, वहीं गाज़ा और मध्य पूर्व के अन्य संघर्ष अभी भी अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बने हुए हैं।
गाज़ा में मानवीय संकट, पानी की कमी और बुनियादी ढांचे के नुकसान को लेकर लगातार चिंता जताई जा रही है।
संयुक्त राष्ट्र और कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने क्षेत्र में स्थायी शांति और मानवीय सहायता पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
निष्कर्ष:-
क्या यह शांति की शुरुआत है?
अमेरिका और ईरान के बीच 12 अरब डॉलर के फंड जारी करने और प्रतिबंधों में अस्थायी राहत का फैसला एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक संकेत माना जा रहा है।
हालांकि, दोनों देशों के बीच दशकों पुराना अविश्वास, परमाणु विवाद और क्षेत्रीय राजनीति अभी भी बड़ी चुनौतियां हैं।
फिलहाल यह समझौता पूर्ण समाधान नहीं बल्कि एक संभावित नए दौर की शुरुआत है। आने वाले महीनों में यह तय होगा कि यह पहल स्थायी शांति और सहयोग की दिशा में आगे बढ़ती है या फिर पुराने मतभेद दोबारा उभरते हैं।
