15 फरवरी 2026 |✍🏻 Z S Razzaqi | वरिष्ठ पत्रकार
रविवार को कोलंबो के R Premadasa International Cricket Stadium में होने वाला यह मैच न केवल क्रिकेट प्रेमियों के लिए रोमांच का केंद्र है, बल्कि श्रीलंका की अर्थव्यवस्था, पर्यटन उद्योग और कूटनीतिक छवि के लिए भी निर्णायक साबित हो सकता है।
बहिष्कार की आशंका से राहत तक: अनिश्चितता का सप्ताह
कुछ दिन पहले पाकिस्तान सरकार के संभावित बहिष्कार संकेतों ने टूर्नामेंट के भविष्य पर प्रश्नचिह्न लगा दिया था। यदि यह फैसला कायम रहता, तो इसके दूरगामी परिणाम केवल एक मैच तक सीमित नहीं रहते। प्रसारण राजस्व, टिकट बिक्री, प्रायोजन अनुबंध और आतिथ्य क्षेत्र—सब पर इसका गंभीर असर पड़ सकता था।
कई दौर की वार्ताओं और कूटनीतिक संवादों के बाद आई यू-टर्न ने स्थिति को पलट दिया। मुकाबला तय कार्यक्रम के अनुसार होने की पुष्टि होते ही श्रीलंका में राहत और उत्साह की लहर दौड़ गई।
पर्यटन और आतिथ्य उद्योग: ‘गेम-चेंजर’ प्रभाव
2022 के आर्थिक संकट के बाद से उबरने की कोशिश कर रहे श्रीलंका के लिए यह मैच टूरिज़्म मल्टीप्लायर की तरह काम कर सकता है। भारत और पाकिस्तान से हजारों प्रशंसकों के आगमन की उम्मीद ने होटल, ट्रैवल एजेंसियों, कैब सेवाओं और स्थानीय कारोबारियों के चेहरों पर मुस्कान लौटा दी है।
उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार:
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बहिष्कार की खबरों के बीच बड़ी संख्या में बुकिंग रद्द हुई थीं
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मैच की पुष्टि के बाद पाँच-सितारा होटलों के रूम रेट में कई गुना उछाल दर्ज हुआ
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रेस्तरां, कैफे, रिटेल और स्मॉल-बिज़नेस सेक्टर में मांग तेज हुई
यह अल्पकालिक उछाल दीर्घकालिक लाभ में भी बदल सकता है—क्योंकि खेल-पर्यटन अक्सर भविष्य की यात्राओं को प्रेरित करता है।
रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था: अस्थायी पर महत्वपूर्ण बढ़त
ऐसे मेगा-इवेंट्स का एक कम चर्चित पहलू टेम्पररी एम्प्लॉयमेंट बूस्ट है। आयोजन प्रबंधन, सुरक्षा, मीडिया प्रोडक्शन, लॉजिस्टिक्स और परिवहन क्षेत्रों में अतिरिक्त अवसर पैदा होते हैं। फ्रीलांस पत्रकारों, कमेंटेटरों और तकनीकी पेशेवरों के लिए यह मंच पेशेवर पहचान मजबूत करने का अवसर देता है।
खेल और राजनीति: दक्षिण एशिया का जटिल समीकरण
दक्षिण एशिया में खेल और राजनीति की रेखाएँ अक्सर धुंधली रहती हैं। भारत-पाकिस्तान मुकाबला तो विशेष रूप से जियो-पॉलिटिकल सिम्बोलिज़्म से जुड़ा रहता है। बहिष्कार की चर्चा और फिर वापसी—दोनों ने क्षेत्रीय कूटनीति की सक्रियता को रेखांकित किया।
श्रीलंका के लिए यह मैच एक संदेश भी है:
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देश बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों का भरोसेमंद मेजबान है
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वह क्षेत्रीय तनावों के बीच संतुलित और संवाद-प्रधान भूमिका निभा सकता है
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खेल कूटनीति का प्रभाव आज भी प्रासंगिक है
ऐतिहासिक संदर्भ: जब क्रिकेट ने जोड़े रिश्ते
करीब तीन दशक पहले 1996 विश्व कप से पहले भारत और पाकिस्तान के खिलाड़ियों ने संयुक्त टीम बनाकर श्रीलंका के समर्थन का अद्वितीय उदाहरण पेश किया था। उस प्रतीकात्मक घटना का स्मरण आज भी क्रिकेट इतिहास में विशेष स्थान रखता है—और वर्तमान घटनाक्रम उस विरासत की याद दिलाता है कि खेल कभी-कभी राजनीतिक सीमाओं से ऊपर उठ सकता है।
टिकट, दर्शक और माहौल: कोलंबो में उत्सव का रंग
स्थानीय आयोजकों को स्टेडियम के पूर्ण क्षमता तक भरने की उम्मीद है। हजारों दर्शकों की मौजूदगी, शहर में बढ़ती हलचल और सुरक्षा-व्यवस्था की व्यापक तैयारियाँ इस बात का संकेत हैं कि कोलंबो एक बार फिर क्रिकेट महाकुंभ का केंद्र बनने जा रहा है।
स्टेडियम के आसपास के इलाकों में:
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होटल और गेस्टहाउस हाउसफुल
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कैफे और पब्लिक-व्यूइंग ज़ोन में भीड़
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स्मृति-चिह्न और मर्चेंडाइज़ की तेज बिक्री
श्रीलंका के लिए व्यापक लाभ: अर्थव्यवस्था से छवि तक
यह मैच केवल 40 ओवर का खेल नहीं, बल्कि इकोनॉमिक स्टिमुलस, ब्रांड-बिल्डिंग और सॉफ्ट-पावर का मिश्रण है। सफल आयोजन से श्रीलंका को भविष्य में और बड़े खेल-इवेंट्स की मेजबानी के अवसर मिल सकते हैं।
निष्कर्ष:-
क्रिकेट का रोमांच, राष्ट्र का अवसर
भारत-पाकिस्तान मैच हमेशा सुर्खियाँ बटोरता है, पर इस बार इसके मायने और गहरे हैं। श्रीलंका के लिए यह मुकाबला आर्थिक ऊर्जा, वैश्विक दृश्यता और क्षेत्रीय संवाद—तीनों का संगम बन सकता है। रविवार को जब गेंद पहली बार पिच पर टप्पा खाएगी, तो सिर्फ खेल नहीं, उम्मीदें भी उड़ान भरेंगी।
