नई दिल्ली।10 फरवरी 2026 |✍🏻 Z S Razzaqi | अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक एवं वरिष्ठ पत्रकार
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PDF लीक ने बढ़ाई सरकार की मुश्किलें
दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता के अनुसार, विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और ऑनलाइन फोरम्स पर यह दावा किया गया कि ‘Four Stars of Destiny’ की प्री-प्रिंट कॉपी PDF फॉर्मेट में खुलेआम साझा की जा रही है। जांच में यह भी सामने आया कि किताब की टाइपसेट कॉपी कुछ वेबसाइट्स पर उपलब्ध है और कुछ ऑनलाइन मार्केटिंग प्लेटफॉर्म्स पर इसका फाइनल कवर ऐसे दिखाया गया, मानो यह बिक्री के लिए उपलब्ध हो।
पुलिस ने स्पष्ट किया कि इस पुस्तक के प्रकाशन के लिए अब तक संबंधित सरकारी विभागों, विशेष रूप से रक्षा मंत्रालय (MoD), से आवश्यक अनुमति नहीं मिली है। इसी संभावित लीक या सुरक्षा उल्लंघन की गहराई से जांच के लिए दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
संसद से सड़क तक सियासी टकराव
यह FIR ऐसे समय में दर्ज की गई है, जब कुछ दिन पहले राहुल गांधी संसद परिसर में इस किताब की एक प्रिंटेड कॉपी हाथ में लेकर कैमरों के सामने आए थे। उन्होंने दावा किया कि सरकार जिस किताब के “अस्तित्व से इनकार” कर रही है, वह वास्तव में मौजूद है। राहुल गांधी फरवरी की शुरुआत से ही लोकसभा में इस आत्मकथा के अंशों को उद्धृत करना चाहते हैं, लेकिन सरकार और लोकसभा अध्यक्ष ने इसे नियमों और राष्ट्रीय हित के खिलाफ बताते हुए अनुमति नहीं दी।
राहुल गांधी का कहना है कि वे केवल एक पत्रिका में प्रकाशित अंशों का हवाला देना चाहते थे, लेकिन सत्ता पक्ष ने इसे भी रोक दिया। इसी विरोध के तहत उन्होंने संसद में किताब की कॉपी दिखाकर राजनीतिक दबाव बढ़ाया।
‘जो उचित समझो, वो करो’ — विवादित दावा
राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि जनरल नरवणे ने अपनी आत्मकथा में 2020 के भारत-चीन सीमा तनाव के दौरान की परिस्थितियों का उल्लेख किया है। उनके मुताबिक, जब चीनी टैंकों की गतिविधियों की जानकारी शीर्ष नेतृत्व को दी गई, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से संदेश आया— “जो उचित समझो, वो करो।”
राहुल गांधी का दावा है कि इससे यह संकेत मिलता है कि उस समय राजनीतिक नेतृत्व ने जिम्मेदारी से कदम पीछे खींच लिया और सैन्य नेतृत्व को अकेला छोड़ दिया।
उन्होंने X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि यही “सच” है, जिसे वे संसद में कहना चाहते हैं, लेकिन सरकार सवालों से बच रही है।
सरकार का पलटवार: राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह और अन्य भाजपा नेताओं ने संसद में स्पष्ट कहा कि यह किताब अब तक प्रकाशित नहीं हुई है और अप्रकाशित सामग्री से उद्धरण देना न केवल संसदीय नियमों के खिलाफ है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी खतरनाक हो सकता है।
राजनाथ सिंह ने सवाल उठाया कि यदि किताब में लिखी बातें तथ्यात्मक हैं, तो लेखक ने अब तक अदालत का रुख क्यों नहीं किया।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी सत्ता पक्ष की दलीलों से सहमति जताते हुए राहुल गांधी को किताब पेश करने की चुनौती दोहराई।
आखिर क्या है Four Stars of Destiny?
जनरल एम.एम. नरवणे की यह आत्मकथा उनके चार दशक से अधिक लंबे सैन्य करियर पर आधारित बताई जाती है। इसमें सियाचिन से लेकर सikkim, नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तान के साथ संघर्ष, और गलवान घाटी की घटनाओं तक का जिक्र होने की बात कही जा रही है।
किताब के प्रकाशक पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने 2023 में इसके प्री-ऑर्डर संकेत दिए थे, लेकिन अब तक यह बाजार में उपलब्ध नहीं है। अमेज़न और फ्लिपकार्ट जैसी साइट्स पर भी इसे “फिलहाल अनुपलब्ध” दिखाया गया।
जनरल नरवणे की चुप्पी
अब तक जनरल नरवणे ने इस ताजा विवाद या PDF लीक पर कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है। हालांकि, अक्टूबर 2025 में एक साहित्य महोत्सव के दौरान उन्होंने कहा था कि किताब रक्षा मंत्रालय की समीक्षा में है और अनुमति मिलना उनके हाथ में नहीं है।
उन्होंने यह भी स्वीकार किया था कि वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की किताबों की जांच एक सामान्य प्रक्रिया है, ताकि संवेदनशील जानकारी सार्वजनिक न हो।
जांच, राजनीति और सुरक्षा—तीनों का संगम
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विषयों पर लिखी गई किताबें राजनीतिक टकराव का औजार बन सकती हैं? PDF लीक की जांच जहां कानून और साइबर सुरक्षा का मामला बन गई है, वहीं संसद में यह मुद्दा सरकार बनाम विपक्ष की तीखी बहस का प्रतीक बन चुका है।
आने वाले दिनों में जांच की दिशा और सरकार की प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि Four Stars of Destiny सिर्फ एक आत्मकथा रहेगी या भारतीय राजनीति के हालिया इतिहास का सबसे विवादित अध्याय बन जाएगी।
